रेलिगेयर में सिंह बंधुओं की हिस्सेदारी घटी

एन सुंदरेश सुब्रमण्यन | नई दिल्ली Oct 13, 2017 09:49 PM IST

वित्तीय सेवा कंपनी रेलिगेयर एंटरप्राइजेज में प्रवर्तकों की शेयर हिस्सेदारी पिछली तिमाही के दौरान करीब आधी घटकर 25.33 फीसदी रह गई। स्टॉक एक्सचेंज को 30 सितंबर को दी गई ताजा शेयरधारिता पैटर्न की जानकारी के अनुसार अरबपति बंधु मालविंदर मोहन सिंह एवं शिविंदर मोहन सिंह और उनके नियंत्रण वाले उपक्रमों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। सिंह बंधु की परिसंपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए दायची सैंक्यो ने कई बार अदालत का रुख करने के बावजूद यह गिरावट आई है। सैंक्यो करीब एक दशक पहले रैनबैक्सी की हिस्सेदारी के अधिग्रहण के मामले में मध्यस्थता फैसले को लागू करवाना चाहती है।
 
रेलिगेयर में उल्लेखनी हिस्सेदारी रखने वाली सभी चार प्रवर्तक उपक्रमों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। मालविंदर की हिस्सेदारी घटकर अब 3.6 फीसदी रह गई जो पहले 6.23 फीसदी थी जबकि छोटे भाई शिविंदर की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले करीब एक चौथाई घटकर 1.5 फीसदी रह गई। आरएचसी फाइनैंस 12.2 फीसदी (16.31 फीसदी से घटकर) हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी प्रवर्तक कंपनी के तौर पर उभरी है। इससे पहले आरएचसी होल्डिंग 22.25 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी प्रवर्तक कंपनी थी लेकिन अब उसकी हिस्सेदारी घटकर महज 7.9 फीसदी रह गई है।
 
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, ढिल्लों परिवार के स्वामित्व वाले उपक्रमों की शेयर हिस्सेदारी में भी इस दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सिंह बंधु के आध्यात्मिक गुरु गुरिंदर सिंह ढिल्लों की पत्नी शबनम ढिल्लों की हिस्सेदारी 8.5 फीसदी से घटकर जून में 0.22 फीसदी रह गई। करीब 4.8 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली बेस्टेस्ट डेवलपर्स की हिस्सेदारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। जबकि ढिल्लों समूह की एक अन्य कंपनी एसजीजीडी प्रोजेक्ट्ïस डेवलपमेंट की हिस्सेदारी घटकर 1.8 फीसदी रह गई जो पिछली तिमाही के अंत में 4.2 फीसदी रही थी। परिणामस्वरूप इस परिवार की हिस्सेदारी घटकर करीब 2.12 फीसदी रह गई जो तीन महीने पहले 17.6 फीसदी रही थी।
 
रेलिगेयर के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया। समूह सूत्रों ने कहा कि कंपनी में सबसे अधिक शेयर हिस्सेदारी के साथ कमान अभी भी सिंह परिवार के हाथों में है। हालांकि कंपनी की वित्तीय हालात को लेकर चिंता और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों की बाध्यताओं के अलावा दायची के साथ कानूनी लड़ाई को लेकर निवेशक परेशान दिख रहे हैं। यही कारण है कि पिछली तिमाही के दौरान इसके शेयर मूल्य में करीब दो तिहाई की गिरावट दर्ज की गई। इससे ऋणदाताओं पर गिरवी शेयरोंं को भुनाने का दबाव बढ़ गया। 
कीवर्ड share, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज,

  
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