विलय-अधिग्रहण के सारे विकल्प के लिए तैयार टाटा स्टील

ईशिता आयान दत्त | कोलकाता Oct 13, 2017 09:50 PM IST

अगले पांच साल में दोगुनी उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए टाटा स्टील विलय-अधिग्रहण के सभी विकल्पों पर विचार करेगी। टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने हाल में कहा था कि कम कर्ज वाली टाटा स्टील तेजी से आगे बढऩे और अगले पांच साल में खुद के दम पर या विलय-अधिग्रहण के जरिए अपनी क्षमता दोगुनी करने के लिए बेहतर स्थिति में होगी। इस बारे में पूछे जाने पर टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक (भारत व दक्षिण पूर्व एशिया) टी वी नरेंद्रन ने कहा, उन्होंने हमारे लिए लक्ष्य तय किया है और इसके बाद इस पर विस्तार से बताया कि इसे खुद के दम पर और विलय-अधिग्रहण के विकल्पों के जरिए हासिल किया जा सकता है। 

 
उन्होंने कहा, कलिंगनगर में खुद के दम पर क्षमता बढ़ाई जाएगी। कलिंगनगर में टाटा स्टील की स्थापित क्षमता पहले चरण में 30 लाख टन है। समझा जाता है कि कंपनी दूसरे चरण के विस्तार कार्यक्रम की मंजूरी निकट भविष्य में निदेशक मंडल से मांगेगी और यह 30 से 50 लाख टन का हो सकता है। नरेंद्रन ने हालांकि कहा कि इस साल क्षमता में किसी तरह की बढ़ोतरी विलय-अधिग्रहण के जरिए होगी। टाटा स्टील ने कहा है कि वह दिवालिया प्रक्रिया के जरिए मिले मौके का फायदा उठाएगी।
 
भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवालिया संहिता के तहत जिन 12 दबाव वाली कंपनियों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है उनमें पांच स्टील क्षेत्र की हैं। ये कंपनियां हैं भूषण स्टील, एस्सार स्टील, भूषण पावर ऐंड स्टील, मोनेट इस्पात व एनर्जी और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स। क्या टाटा स्टील पूर्वी भारत में परिसंपत्तियों पर नजर डालेगी, नरेंद्रन ने कहा कि हम विलय-अधिग्रहण के सभी विकल्पों पर नजर डाल रहे हैं। पूर्वी भारत में भूषण स्टील, भूषण पावर ऐंड स्टील, मोनेट इस्पात ऐंड एनर्जी और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स की परिसंपत्तियां हैं जबकि एस्सार स्टील की परिसंपत्तियां पश्चिम में है। इन परिसंपत्तियों का आकार 15 लाख टन से लेकर 1 करोड़ टन तक है।
 
एक विश्लेषक ने कहा, पश्चिम व पूर्व की परिसंपत्तियां टाटा स्टील के मायने रखेगी क्योंकि पश्चिम में कोई अधिग्रहण इसे उस इलाके बाजार के बाजार तक पहुंचाएगा। विश्लेषक ने कहा, दूसरी ओर टाटा स्टील के खदान पूर्व में हैं। हर टन स्टील के लिए तीन टन कच्चे माल की दरकार होती है, ऐसे में टाटा स्टील तब अपनी लॉजिस्टिक लागत बचा पाएगी जब वह पूर्वी इलाके में संयंत्र का अधिग्रहण करेगी। यह हमेशा तैयार उत्पाद पश्चिम में भेजती है। अभी टाटा स्टील की स्थापित क्षमता 1.27 करोड़ टन है और क्षमता दोगुनी करने का मतलब होगा इसे 2.54 करोड़ टन पर पहुंचाने का। 
कीवर्ड tata steel, चेयरमैन एन चंद्रशेखरन,

  
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