भारत में महंगी हैं इक्विटी योजनाएं

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Oct 13, 2017 09:51 PM IST

अग्रिम कमीशन पर सीमा लगाए जाने के बावजूद देसी इक्विटी योजनाएं वैश्विक स्तर पर सबसे महंगी की श्रेणी में आती हैं। इक्विटी व आवंटन फंड के लिए शुल्क व खर्च के लिहाज से भारत 25 अग्रणी देशों में शामिल है। यह जानकारी मॉर्निंगस्टार के अध्ययन से मिली। शुल्क व खर्च के मानदंडों पर इसने भारत को औसत से नीचे रखा है। इस आकलन में प्रमुख संपत्ति वर्ग इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और संपत्ति आवंटन में  संपत्ति भारांक के औसत शुल्क का ध्यान रखा गया है। अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय फंड बाजार की विकसित होती प्रकृति को देखते हुए यह स्थिति असामान्य नहीं है और इसका असर वितरण आदि पर पड़ता है। फंडों के अधिग्रहण पर भारतीय निवेशक फ्रंट लोड नहीं चुकाते और फिक्स्ड इनकम फंडों के लिए खर्च का अनुपात वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी है। भारत फंडों को प्रदर्शन शुल्क वसूलने से रोकता है। साथ ही एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने साल 2015 में अग्रिम कमीशन 100 आधार अंक पर सीमित कर दी थी। बाजार नियामक सेबी कुछ समय से म्युचुअल फंडों की तरफ से वसूले जाने वाले कुल खर्च अनुपात को घटाने के लिए कह रहा है।
 
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य जी महालिंगम ने हालिया सम्मेलन में कहा, आज आप भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग के कुल खर्च अनुपात पर नजर डालें तो यह दूसरे इलाकों के मुकाबले सहज स्तर से काफी ज्यादा है। बिक्री में सुधार के साथ हमें निश्चित तौर पर इसकी जांच करनी चाहिए कि क्या हम कुल खर्च अनुपात घटा सकते हैं। यह सही समय है जब उद्योग वास्तव में मार्जिन में कमी पर विचार कर सकता है, ज्यादा खुदरा निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। कुल खर्च अनुपात सालाना शुल्क है, जो किसी योजना के एनएवी से घटाया जाता है। इसके जरिए मोटे तौर पर प्रबंधन व सलाहकार शुल्क, ऑडिट शुल्क, कस्टोडियन शुल्क, रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंट शुल्क व ब्रोकरेज शुल्क पूरा किया जाता है।
 
आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल ने कहा, भारतीय फंड हाउस की तरफ से वसूले जाने वाले खर्च अनुपात अन्य विकसित बाजारों के साथ सख्ती से तुलनायोग्य नहीं है। भारतीय एमएफ की तरफ से वसूले जाने वाले खर्च अनुपात में सभी लागत शामिल हैं। अन्य विकसित बाजारों में कस्टोडियन व प्लेटफॉर्म शुल्क आदि को निवेशकों से वसूले जाने वाले कुल शुल्क में शामिल नहींं किया जाता। विगत में वितरकों ने माॉर्निंगस्टार के तथ्यों को सही नहीं माना है। उदाहरण के लिए साल 2015 के अध्ययन में भारत में इक्विटी फंडों का कुल खर्च अनुपात 2.65 फीसदी था। हालांकि वितरक निकाय के अध्ययन में फाउंडेशन ऑफ इंडिपेंडेंट फाइनैंशियल एडवाइजर्स ने कुल खर्च का दोबारा आकलन 2.07 फीसदी के तौर पर किया था और इसमें सलाहकार व प्लेटफॉर्म शुल्क का ध्यान रखा गया था। इसने मॉर्निंगस्टार के अध्ययन में 25 देशों की सूची में भारत को पांचवां सबसे महंगा क्षेत्र बना दिया। साल 2007 में मॉर्निंगस्टार इंडिया के अध्ययन में एमएफ के नियमन व कराधान के लिहाज से भारत का औसत ग्रेड बनाए रखा गया था।
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