खुद के उपयोग के लिए आईटी सेवा का विस्तार अच्छा : विप्रो

आयान प्रामाणिक और रघु कृष्णन | बेंगलूरु Oct 18, 2017 09:44 PM IST

आईटी सेवा कंपनी विप्रो ने कहा है कि खुद के इस्तेमाल के लिए आईटी सेवा (कैप्टिव) का भारत में हो रहा विस्तार एक मौका है, जिससे क्लाइंटों के साथ गहरा संबंध बनाने और प्रतिस्पर्धी लागत पर सेवाओं व समाधान की पेशकश में मदद मिलेगी।भारत वैश्विक फर्मों की दूसरी लहर का सामना कर रहा है जो खुद के इस्तेमाल वाली आईटी सेवाओं के विस्तार और विप्रो जैसे वेंडरों को आउटसोर्सिंग में कटौती पर विचार कर रही हैं क्योंकि वे डिजिटल, एनालिटिक्स और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में आंतरिक तौर पर क्षमता बनाना चाहती हैं। उनका मानना है कि यह उनके कारोबार के लिए अहम है, जो वे खुद के पास बनाए रखना चाहते हैं, न कि तीसरे पक्षकार वेंडरों पर इसके लिए आश्रित होना चाहती हैं।
 
विप्रो ने कहा, आउटसोर्सिंग पर निर्भरता घटाने के लिए वह भारत में कैप्टिव स्थापित करने में क्लाइंटों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करेगी, इसके बजाय वह उनकी पूरक बनेगी ताकि वैसा ही ग्राहक अनुभव और लागत के फायदे आदि सुनिश्चित हो सके। भारतीय सेवा कंपनियों मसलन विप्रो और इन्फोसिस के काफी क्लाइंटों ने कुछ तकनीकी सेवाओं में अपनी भारतीय तकनीकी इकाइयोंं के जरिये इनसोर्सिंग शुरू की। 154 अरब डॉलर वाले भारतीय आईटी-बीपीएम सेवाओं में इसका आकार 25 अरब डॉलर का अनुमनित है।
 
विप्रो के मुख्य वित्तीय अधिकारी जे दलाल ने कहा, जब कोई भारत आता है तो यह बड़ी खबर होती है, चाहे कंपनी खुद के दम पर भारत में कैप्टिव की स्थापना के लिए आए या विप्रो जैसी सेवा प्रदाता के जरिये। उन्हें अहसास होगा कि भारत में अपना पहला कदम है और दूसरा कदम किसी सेवा प्रदाता के पास जाने का है, जो पेशकश कर सकती है और इसके नतीजे हमेशा बाजार के साथ होते हैं। बाजार के हिसाब से लागत रखने की हमारी क्षमता, पेशकश व समाधान आदि कैप्टिव के मुकाबले निस्संदेह ज्यादा है।
 
विप्रो ने कुल राजस्व में पारंपरिक कारोबारी इकाई मसलन संचार से योगदान घटते देखा है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 6.5 फीसदी रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि में 7.5 फीसदी रहा था। विश्लेषकों ने कहा, इसकी आंशिक वजह कैप्टिव की स्थापना पर क्लाइंट के आईटी बजट और तकनीकी सेवा के एक हिस्से की इनसोर्सिंग हो सकती है। दलाल ने कहा, हमारे ज्यादा क्लाइंट अपने कैप्टिव के जरिए विप्रो के साथ काम करेंगे क्योंकि उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की हमारी क्षमता है।
 
बिजनेस स्टैंडर्ड ने पिछले साल अक्टूबर में खबर दी थी कि इन्फोसिस ऑस्ट्रेलियाई दूरसंचार कंपनी टेलस्ट्रा को भारत में कैप्टिव की स्थापना में मदद कर रही है ताकि इनसोर्सिंग क्षमता में सुधार हो। जुलाई-सितंबर के नतीजे से विश्लेषकों को निराश करने वाली विप्रो ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में दो फीसदी की बढ़त का अनुमान सामने रखा है। विप्रो ने कहा कि कई ग्राहकों के साथ काम करने और सेवा की डिलिवरी में सबसे अच्छी चीजों के इस्तेमाल से वैश्विक कैप्टिव के लिए उन्हें बेहतर साझेदार बनने में मदद मिलती है।
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