एडुकॉम्प के लेनदारों को सहना पड़ेगा बड़ा नुकसान

वीणा मणि | नई दिल्ली Oct 25, 2017 10:12 PM IST

एडुकॉम्प सॉल्युशंस का दिवालिया मामला सिनर्जीज डूरे जैसा हो सकता है, जहां लेनदारों को भारी रकम बट्टे खाते में डालनी पड़ सकती है। इस मामले से जुड़े सूत्र ने कहा कि बट्टे खाते की रकम 50 फीसदी से ज्यादा हो सकती है। कुल बकाया करीब 3,000 करोड़ रुपये है, वहीं पिछले कुछ सालों से सालाना राजस्व 150 से 200 करोड़ रुपये है। उदाहरण के लिए 2015-16 में कंपनी का राजस्व 223.09 करोड़ रुपये रहा था, जिसके चलते शुद्ध नुकसान 343.34 करोड़ रुपये रहा। ऐसे में कर्ज के ब्याज का भुगतान चुनौती है।
 
रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के लिए समापन एक विकल्प है, लेकिन लेनदारों के लिए यह सबसे खराब स्थिति होगी। इससे लेनदारों को अपनी बकाया रकम का महज 5 से 10 फीसदी मिलेगा और इसी वजह से सूत्रों का कहना है कि इस पर विचार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया, ऐसा इसलिए है क्योंकि एडुकॉम्प की ज्यादातर बौद्धिक संपदा का संपत्ति आधार कम है। हालांकि तीन से चार निवेशकों ने कंपनी में निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। यह जानकारी सूत्रों ने दी। कंपनी के दिवालिया समाधान प्रोफेशनल ने कंपनी के लिए दिवालिया संहिता के नियमों के तहत अभिरुचि पत्र जारी किए थे।
 
समाधान प्रक्रिया से जुड़े लोगों का कहना है कि सुधार मुश्किल है क्योंकि कई नई तकनीक शामिल नहीं की गई है और न ही नए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। कर्ज पुनर्गठन की योजना के तहत इसकी एक लेनदार आईसीआईसीआई बैंक को कंपनी ने विद्या मंदिर की हिस्सेदारी 90.56 करोड़ रुपये में बेच दी थी। साल 2013 और 2014 में कंपनी ने संबंधित उद्यमों मसलन यूरोकिड्स की हिस्सेदारी बेची थी।
 
3 करोड़ से ज्यादा लोग एडुकॉम्प के सॉल्युशंस का इस्तेमाल करते हैं। सूत्रों ने कहा कि ऐक्सिस बैंक व आईसीआईसीआई बैंक जैसे लेनदारों ने एडुस्मार्ट सर्विसेज के लिए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से संपर्क साधा था ताकि अपना बकाया वसूल कर सके। इसकी वजह यह है कि एडुस्मार्ट एडुकॉम्प की गारंटर है। इस बारे में जानकारी के लिए बैंकों को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।
 
इसके अलावा रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को भेजे गए ईमेल का भी कोई जवाब नहीं मिला। एडुकॉम्प के प्रवर्तक शांतनु प्रकाश को भेजे गए एसएमएस का भी कोई जवाब नहीं मिला। नए रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने पिछले प्रोफेशनल से तीन महीने बाद कंपनी का कार्यभार संभाला, जब एनसीएलटी में मामला स्वीकार हुआ। एडुकॉम्प सॉल्युशंस का मामला एनसीएलटी में 30 मई को स्वीकार किया गया था। 
 
इसे देखते हुए कंपनी समाधान योजना जमा कराने के लिए विस्तार चाहती है। यह जानकारी समाधान प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने दी। अभी कंपनी के रोजाना के कामकाज की फंडिंग आंतरिक स्रोतों से होती है। सूत्रों ने कहा, चूंकि कंपनी ने हाल में किसी अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं या सॉल्युशन को उन्नत नहीं बनाया है, लिहाजा कंपनी के संचालन के लिए अंतरिम तौर पर वित्त व्यवहार्य नहीं है। एडुकॉम्प सॉल्युशंस ने दिवालिया समाधान का रास्ता तब अपनाया जब यह साल 2013 में कंपनी कर्ज पुनर्गठन की कोशिश में नाकाम हो गई। कंपनी को कर्ज देने वाले 15 बैंको में से 12 कंपनी कर्ज पुनर्गठन से बाहर निकल गए, जिसके बाद कंपनी ने सुधार के लिए दिवालिया संहिता के तहत मदद लेने का विकल्प चुना।
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