विभिन्न बैंकों के परपेचुअल बॉन्डों का प्रतिफल ढहा

अनूप रॉय और ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Oct 29, 2017 09:54 PM IST

सरकार की तरफ से पुनर्पूंजीकरण के ऐलान के बाद सरकारी बैंको की तरफ से जारी परपेचुअल बॉन्डों का प्रतिफल काफी ज्यादा टूट गया है और इसका फायदा उठाते हुए बैंकों ने सस्ते में रकम जुटानी शुरू कर दी है और निवेशकों को शायद ही पर्याप्त मिल पाएगा। कुछ मामलों में प्रतिफल 150 आधार अंक तक टूट गया है क्योंकि बैंक अगले कुछ सालों के लिए बेहतर तरीके से पूंजीकृत होंगे और उन्हें पूंजी के लिए बाजार पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रतिफल कम होने पर बॉन्ड की कीमतें बढ़ती हैं।
 
बॉन्डधारकों के लिए मुख्य चिंता यह है कि बैंक इस पर ब्याज भुगतान संभावित तौर पर टाल सकते हैं। बैंकोंं से बॉन्डधारकों को ब्याज का भुगतान अपने लाभ या राजस्व कोष से करने की उम्मीद की जाती है। अगर बैंक लाभ में नहीं रहता है तो वह संचयी या वैधानिक कोष से ब्याज भुगतान कर सकता है। परपेचुअल बॉन्ड की परिपक्वता के लिए कोई तय अवधि नहीं होती, लेकिन इसे जारी करने वाले के पास कॉल ऑप्शन होता है, इसका मतलब यह हुआ कि ऐसे बॉन्ड को जारी करने वाली इच्छा के मुताबिक कभी भी भुनाया जा सकता है। बैंक इस बॉन्ड का इस्तेमाल अपनी मुख्य पूंजी यानी अतिरिक्त टियर-1 पूंजी में इजाफा करने में करता है। बेसल-3 अनुपालन वाले बॉन्ड भी हैं, जिनमें निवेशकों के लिए भारी कटौती या पूर्ववर्ती ब्याज आय के संबंध में अद्भुत उपबंध होता है, अगर बैंक दबाव में हो। प्राकृतिक तौर पर इस पर ब्याज की पेशकश अन्य बैंकों के मुकाबले थोड़ा ज्यादा होता है ताकि संभावित कटौती की भरपाई हो सके। 
 
बैंक ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को 8.79 फीसदी पर 500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। बाजार के सूत्रों के मुताबिक, पुनर्पूंजीकरण से पहले बैंंक का परपेचुअल बॉन्ड प्रतिफल 10.9 फीसदी था। इसी तरह गुरुवार को आंध्रा बैंक ने 9.20 फीसदी पर 500 करोड़ रुपये जुटाए, वहीं इसका पहले का बॉन्ड का प्रतिफल 11.25 फीसदी था, जो पुनर्पूंजीकरण से पहले का है। उधर, यूनियन बैंक के बॉन्ड का प्रतिफल 8.65 फीसदी था, जो पहले 9.75 फीसदी रहा था। पीएनबी का बॉन्ड 8.60 फीसदी पर कारोबार कर रहा था, जो पहले 9.60 फीसदी रहा था। पहले इन बॉन्डों पर 9-12 फीसदी का उच्च प्रतिफल मिलता था। इसकी तुलना में सरकारी बैंकों की तरफ से जारी पांच से सात वर्ष वाली एएए रेटिंग वाली प्रतिभूतियां सात से आठ फीसदी का प्रतिफल दे रही थी।
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