बाजारों में फ्लिपकार्ट व पेटीएम की धाक

अलनूर पीरमोहम्मद | बेंगलूरु Nov 06, 2017 10:05 PM IST

जापानी दिग्गज सॉफ्टबैंक के संस्थापक व चेयरमैन मासायोशी सन ने आज कहा कि भारत में कंपनी के दो सबसे बड़े निवेश फ्लिपकार्ट और पेटीएम के पास उनके संबंधित कारोबार में बाजार की बहुलांश हिस्सेदारी है और ये कंपनियां स्थानीय व वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे है। सन ने सॉफ्टबैंक की दूसरी तिमाही के नतीजे की घोषणा के समय पत्रकारों से कहा, कंपनी के 100 अरब डॉलर के विजन फंड में से दो भारतीय कंपनियों ने इस साल संयुक्त रूप से 3.9 अरब डॉलर हासिल किए।
 
उन्होंने कहा, भारत की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के पास देश के ई-कॉमर्स बाजार की 60 फीसदी हिस्सेदारी है और यह एमेजॉन इंडिया से बड़ी है। एमेजॉन से बड़ी किसी कंपनी के बारे में बताना मुश्किल है। मेरा मानना है कि चीन के बाद आकार के लिहाज से भारत सबसे बड़ा होगा और बड़ी क्षमता वाले इस बाजार में फ्लिपकार्ट की हिस्सेदारी 60 फीसदी है, जो अच्छी शुरुआत है।
 
फ्लिपकार्ट का दावा है कि हालिया त्योहारी सीजन सेल में भारी कामयाबी के ब ाद इसनेभारतीय ई-कॉमर्स बाजार की 70 फीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा किया है और यह प्रतिस्पर्धी एमेजॉन के आकार के मुकाबले करीब दोगुनी है। इस साल टेनसेंट की अगुआई वाले निवेशकों से 1.4 अरब डॉलर और सॉफ्टबैंक से 2.5 अरब डॉलर जुटाने के बाद कंपनी आक्रामकता के साथ अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ा रही है।
 
सन ने कहा कि सॉफ्टबैंक के विजन फंड का दूसरा सबसे बड़ा निवेश पेटीएम का भारत के डिजिटल भुगतान बाजार में 58 फीसदी हिस्से पर नियंत्रम है और आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने साल दर साल के हिसाब से मार्च 2017 में समाप्त 12 महीने में 230 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की।  सन ने कहा, चीन में कारोबारी मॉडल के तौर पर अलीपे कामयाब रही है और अलीपे और सॉफ्टबैंक पेटीएम को समर्थन दे रहे हैं। हम पेटीएम में दूसरे सबसे बड़े हिस्सेदार हैं। 
 
पिछले साल दिसंबर में सरकार के नोटबंदी कार्यक्रम से सबसे ज्यादा फायदा हासिल करने वाली पेटीएम फ्रीचार्ज व मोबीक्विक जैसी भारतीय प्रतिस्पर्धी से काफी आगे है। भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अभी तक बड़ी विदेशी कंपनी का अभाव था, लेकिन गूगल के हालिया प्रवेश और व्हाट्सऐप की तरफ से पेश होने वाले पेमेंट फीचर के साथ पेटीएम को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलने की संभावना है।
 
भारत के ऑनलाइन कॉमर्स बाजार को लेकर सन का नजरिया तेजी का है, लेकिन इनके पिछले दांव योजना के मुताबिक फायदेमंद नहीं रहे हैं। फ्लिपकार्ट की प्रतिस्पर्धी स्नैपडील में करीब 1 अरब डॉलर के निवेश के बाद वह इसे नुकसान के तौर पर बट्टे खाते में डालने के लिए बाध्य हुए थे जब एमेजॉन ने इसकी बाजार हिस्सेदारी में सेंध लगा दी थी और भारत में इसे पछाड़कर दूसरे नंबर की ई-कॉमर्स कंपनी बन गई थी। इस साल स्नैपडील और फ्लिपकार्ट के विलय की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई, जिसके बाद सॉफ्टबैंंक ने स्वतंत्र रूप से निवेश का फैसला लिया।
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