इक्विटी के जरिए जुटाए गए रिकॉर्ड 1.4 लाख करोड़ रु.

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा | मुंबई/नई दिल्ली Nov 16, 2017 09:54 PM IST

कैलेंडर वर्ष 2017 में इक्विटी के जरिए जुटाई गई रकम अब तक के सर्वोच्च स्तर 1.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। कुल मिलाकर कंपनियों ने जनवरी से लेकर 14 नवंबर 2017 तक विभिन्न इक्विटी प्रतिभूतियों के जरिए रिकॉर्ड 1,40,073 करोड़ रुपये जुटाए। इन प्रतिभूतियों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम, एफपीओ, ओएफएस, राइट्स इश्यू और क्यूआईपी समेत संस्थागत नियोजन कार्यक्रम शामिल है।

 
यह रकम पूरे कैलेंडर वर्ष 2016 में जुटाई गई रकम के मुकाबले दोगुनी है, जब कंपनियों ने 46,733 करोड़ रुपये जुटाए थे। कैलेंडर वर्ष 2010 में इन्होंने इक्विटी के जरिए 1,04,462 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह जानकारी प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से मिली।विश्लेषकों ने कहा कि द्वितीयक बाजार में खरीदारी के बेहतर माहौल के चलते ऐसा हुआ, क्योंकि बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी-50 में कैलेंडर वर्ष में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
 
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, रकम जुटाने के लिए प्रवर्तक द्वितीयक बाजार में तेजी का फायदा उठा रहे हैं। कई मिडकैप कंपनियों का मूल्यांकन समय के साथ सुधरा है और प्रवर्तक इस मौके का इस्तेमाल बाजार से रकम जुटाने में कर रहे हैं, जिनमें माइक्रो-फाइनैंंस कंपनियां, एनबीएफसी और निजी क्षेत्र के बैंक शामिल हैं।
 
बैंक, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों समेत वित्तीय क्षेत्र की हिस्सेदारी इसमें आधी से ज्यादा है और इन्होंने कुल रकम में से करीब 85,000 करोड़ रुपये हासिल किए हैं। अन्य क्षेत्रों मसलन बिजली व वितरण, टिकाऊ उपभोक्ता, धातु, रियल्टी, खुदरा और दवा क्षेत्र ने 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए। आने वाले समय में विश्लेषकों को लगता है कि भारतीय कंपनी जगत की तरफ से रकम जुटाने का सिलसिला जारी रहेगा, लेकिन इसकी रफ्तार कैलेंडर वर्ष 2017 की तरह नहीं रहेगी। सीएलएसए के कार्यकारी निदेशक व भारतीय रणनीतिकार महेश नंदूरकर ने कहा, अगले साल इक्विटी जारी होने की रफ्तार धीमी रह सकती है और यह एक लाख करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है। कैलेंडर वर्ष 2017 में कई आईपीओ पेश हुए, खास तौर से बीमा क्षेत्र से। इनकी योजना कुछ समय से बन रही होगी और ये बाजार में कैलेंडर वर्ष 2017 में उतारे गए। मुझे नहीं लगता कि अगले साल हमें बीमा कंपनियों की तरफ से इतनी ज्यादा प्रतिभूतियोंं की आपूर्ति नजर आएगी। इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में इक्विटी जारी करने की रफ्तार घट सकती है।
 
इसके अलावा कंपनियों की आय में अर्थपूर्ण सुधार के अभाव में बाजार में तेजी की रफ्तार को लेकर चिंता है। विशेषज्ञों को कैलेंडर वर्ष 2018 में ऐसा ही रिटर्न मिलने की उम्मीद नहीं है, जैसा कि कैलेंडर वर्ष 2017 में देखा गया था क्योंकि विधानसभा के चुनाव, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कदम, कंपनियों की आय और तेल की कीमतें केंद्र में आ जाएंगी। चोकालिंगम ने कहा, अब बाजार का ध्यान अगले एक साल में विधानसभा चुनाव के नतीजों और देश की राजकोषीय सेहत की तरफ जाएगा। 
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