बढ़ सकता है भारत का व्यापार घाटा

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Nov 17, 2017 10:04 PM IST

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज की तरफ से रेटिंग को उन्नत किए जाने से सरकार खुश है, लेकिन इससे भारत का व्यापार घाटा बढ़ सकता है। मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज ने शुक्रवार को भारत की सॉवरिन रेटिंग में सुधार किया, जो नोटबंदी, जीएसटी और बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या के समाधान के लिए नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार के फैसले पर भरोसा जताता है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भारत के प्रति भरोसा बढ़ सकता है और इस तरह से देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में इजाफा हो सकता है।
 
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस कदम से रुपया मजबूत होगा, लेकिन नोटबंदी व जीएसटी के चलते पहले से ही परेशानी का सामना कर रहे निर्यात क्षेत्र को अब और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कम कीमत वाली मुद्रा सामान्य तौर पर किसी देश के निर्यात क्षेत्र को फायदा पहुंचाता है। 2016-17 में भारत का व्यापार घाटा 108.5 अरब डॉलर रहा, जो इससे पूर्व वर्ष के 118.71 अरब डॉलर के मुकाबले थोड़ा कम है।
 
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया मजबूत रहा और 3 बजे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 64.98 पर था। एक दिन पहले रुपया 65.32 पर बंद हुआ था। शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार का माहौल बेहतर रहा, लेकिन मुद्रा की चाल निर्यात की रफ्तार को मुश्किल बना सकता है। यह मानना है वरिष्ठ कारोबारी विशेषज्ञों का। इस साल अब तक रुपये में 5.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इक्विटी व डेट में क्रमश: 7.97 अरब डॉलर और 22.34 अरब डॉलर की खरीदारी की है।
 
भारत में रेटिंग एजेंंसियों के वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते रुपये में सतत बढ़ोतरी का अनुमान था। इसमें यह अनुमान भी शामिल है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगली बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा, लिहाजा पूंजी की निकासी हो सकती है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में देश से 14.5 अरब डॉलर से ज्यादा रकम का निवेश हुआ है। यह जानकारी औद्योगिक नीति व संवर्धन विभाग के आंकड़ों से मिली। दूसरी ओर लगातार 13 महीने तक बढ़त दर्ज करने और सितंबर में 25 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज करने के बाद भारत का निर्यात अक्टूबर में पहली बार 1.12 फीसदी घट गया। इस कैलेंडर वर्ष में कुल आयात की सबसे कम रफ्तार के बावजूद अक्टूबर में व्यापार घाटा बढ़कर 35 महीने के उच्चस्तर 14 अरब डॉलर पर पहुंच गया। सितंबर में यह 9 अरब डॉलर और एक साल पहले की समान अवधि में 11.1 अरब डॉलर रहा था। निर्यातकों का आरोप है कि उन्हें जीएसटी के तहत कर भुगतान का रिफंड मिलना बाकी है, जिसके चलते यह क्षेत्र लुढ़क रहा है।
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा, बिना रिफंड के लगातार चार महीने जीएसटी चुकाने के बाद छोटे व मझोले उद्यम परेशान है। निर्यात में और गिरावट को रोकने के लिए तत्काल उपचारात्मक कदम उठाए जाने की दरकार है, अन्यथा नवंबर 2017 में स्थिति और खराब हो सकती है। गुप्ता ने कहा कि ज्यादा रोजगार देने वाले सभी क्षेत्रों मसलन चमड़ा व चमड़े से बने उत्पाद, रत्न व आभूषण, सिले सिलाए परिधान आदि में उत्पादन तेजी से घटा है। 
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