सेंसेक्स: फार्मा का वजन घटा

अभिनीत कुमार | मुंबई Nov 20, 2017 09:35 PM IST

सेंसेक्स से औषधि क्षेत्र की दो कंपनियों- ल्यूपिन और सिप्ला- को इंडसइंड बैंक और येस बैंक द्वारा संभवत: बाहर किए जाने से बंबई स्टॉक एक्सचेंज के इस प्रमुख संवेदी सूचकांक में औषधि क्षेत्र का भारांश घटकर पांच साल के निचले स्तर को छूने वाला है। सेंसेक्स में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और अमेरिकी एसऐंडपी का संयुक्त मालिकाना हक है जो 30 बेहतरीन शेयरों के भारांश पर आधारित सूचकांक है।
 
इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'दुनिया भर में सूचकांक सफल शेयरों पर सवार होते हैंक्योंकि वे बाजार पूंजीकरण भारांश पर आधारित होते हैं।' शुक्रवार को 4 औषधि कंपनियों का सेंसेक्स में कुल भारांश 4 फीसदी था जिसमें सिप्ला का भारांश 0.9 फीसदी और ल्यूपिन का भारांश 0.6 फीसदी था। जबकि अन्य दो औषधि कंपनियों में सन फार्मा का भारांश 1.7 फीसदी और डॉ रेड्डïीज लैबोरेटरीज का भारांश 0.8 फीसदी रहा था। बीएसई और एसऐंडपी ने शुक्रवार को कहा था कि सिप्ला और ल्यूपिन दोनों को 18 दिसंबर तक बाहर किया जा सकता है। सेंसेक्स से सिप्ला और ल्यूपिन के बाहर होने पर इस सूचकांक में औषधि कंपनियों का भारांश करीब 150 आधार अंक घट जाएगा। इसके अलावा यदि कोई अन्य बदलाव नहीं हुआ तो सेंसेक्स में औषधि कंपनियों का भारांश महज 2.5 फीसदी रह जाएगा। इसके साथ ही सेंसेक्स में औषधि क्षेत्र से महज दो कंपनियों का प्रतिनिधित्व रहेगा। इससे पहले वित्त वर्ष 2011-12 के अंत में सेंसेक्स में औषधि क्षेत्र का भारांश घटकर महज 2.7 फीसदी रह गया था।
 
चोकालिंगम ने कहा, 'इसलिए औषधि क्षेत्र के शेयरों का सेंसेक्स से बाहर होने का संकेत स्पष्टï है कि इन कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी घट रही है। लेकिन कमाई की कहानी यहींं खत्म नहीं हो जाती क्योंकि कई कंपनियों ने अपने प्रदर्शन के बल पर इस प्रकार के सूचकांक में अपनी वापसी की है।' एशियन पेंट्ïस उन कंपनियों में शामिल है जिसने सेंसेक्स से बाहार होने के बाद अपने प्रदर्शन के बल पर इस सूचकांक में वापसी की।
 
औषधि कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्प घटने का एक प्रमुख कारण सबसे बड़े औषधि बाजार अमेरिका से उनकी आय में कमी आना है। अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए की नियामकीय एवं अनुपालन संबंधी सख्ती और तगड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण औषधि कंपनियों की आय प्रभावित हो रही है। पिछले पांच साल के दौरान सेंसेक्स में औषधि क्षेत्र के शेयरों के भारांश के एक विश्लेषण से पता चलता है कि मार्च 2012 में न्यूनतम 2.7 फीसदी भारांश के बाद मार्च 2016 के अंत तक वह बढ़कर 8.1 फीसदी को चुका था। उसके बाद औषधि कंपनियों के भारांश में तेज गिरावट दर्ज की गई और वह मार्च 2017 के अंत तक 6.2 फीसदी और पिछले सप्ताह शुक्रवार को 4 फीसदी रह गया। फिलहाल उसमें और गिरावट आने और पांच साल के निचले स्तर तक लुढ़कने की आशंका है।
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