ओपीजी पर धनशोधन का शक

श्रीमी चौधरी | मुंबई Nov 20, 2017 09:39 PM IST

आयकर विभाग का कसता शिकंजा

► प्रवर्तन निदेशालय से और जांच के लिए जल्द कहेगा आयकर विभाग
कर विभाग ने ओपीजी सिक्योरिटीज के यहां से 11 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की। साथ ही विदेशी बैंक खातों व विदेशी ट्रेडिंग फंडों से जुड़े दस्तावेज इकट्ठा किए, जो दे रहे हैं धनशोधन का संकेत
सूत्रों ने कहा कि कर विभाग को पूरे को-लोकेशन मामले पर मजबूत राजनीतिक समर्थन का है शक, सेबी की तकनीकी समिति के नतीजे पर आधारित था कर विभाग का तलाशी अभियान

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर दूसरे सदस्यों के मुकाबले समय से पहले अनुचित तौर पर पहुंच के बाद आंखों की किरकिरी बनी दिल्ली की ओपीजी सिक्योरिटीज को और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग इस ब्रोकरेज कंपनी के सभी बैंकिंग लेनदेन पर नजर डाल चुका है, जहां देश के बाहर के खाते में रकम भेजी गई है।

पिछले हफ्ते आयकर विभाग ने एनएसई के कम से कम आधा दर्जन मौजूदा व पूर्व अधिकारियों और ब्रोकरों के यहां सघन तलाशी ली, जिन्हें एक्सचेंज की ट्रेडिंग व्यवस्था में गड़बड़ी का लाभ मिला हो सकता है। कर विभाग ने ओपीजी सिक्योरिटीज के यहां से 11 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की। साथ ही विदेशी बैंक खातों व विदेशी ट्रेडिंग फंडों से जुड़े दस्तावेज इकट्ठा किए, जो धनशोधन का संकेत दे रहा है।

सूत्रों ने कहा कि धनशोधन व विदेशी मुद्रा के मामले में उल्लंघन आदि की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय को इस मामले में अलग से जांच करने के लिए कहा जा सकता है। आयकर विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ओपीजी समूह के 50 ठिकानों और मुंबई, दिल्ली, बेंगलूरु व कोलकाता में अन्य के यहां तलाशी के दौरान हमने लेनदेन के कई रिकॉर्ड पाए, जहां रकम का हस्तांतरण देश के बाहर के खाते में हुआ है।

इस बारे में जानकारी के लिए ओपीजी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक व संस्थापक संजय गुप्ता को भेजे गए एसएमएस का जवाब नहीं मिला और इन्होंने फोन पर भी कोई जवाब नहीं दिया। आयकर विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तलाशी अभिायन रविवार तक चला। विभाग ने को-लोकेशन मामले में संभावित लाभार्थियों के बयान भी दर्ज किए हैं। इन व्यक्तियों से इनकी भूमिका व जिम्मेदारियोंं पर काफी ज्यादा पूछताछ हुई है।

सूत्रों ने कहा कि कर विभाग का तलाशी अभियान बाजार नियामक सेबी की तकनीकी समिति के नतीजे पर आधारित था, जिसकी वजह से कई फोरेंसिक ऑडिट हुए। दिल्ली में कर विभाग ने 14 लोगों को भेजे गए कारण बताओ नोटिस का भी अध्ययन किया है। उपरोक्त नोटिस के नतीजे का हवाला देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह रिपोर्ट कम से कम तीन लोगों पर गंभीर सवाल उठाता है, जिन्होंने लगातार ओपीजी सिक्योरिटीज की मदद की या उनके संपर्क में रहे। इससे ब्रोकरेज को अन्य सदस्यों के मुकाबले जल्दी लॉग इन करने का मौका मिला और अनुचित लाभ उठाने का भी।

कर विभाग इस रिपोर्ट के नतीजे पर और सूचनाएं इकट्ठा कर रहा है, जो बताता है कि ब्रोकिंग फर्म वे 2 वेल्थ के यहां ट्रेडिंग वॉल्यूम जनवरी 2014 के 3.3 फीसदी के मुकाबले साल 2015 के मध्य में करीब नौ फीसदी पर पहुंच गया। इसने ब्रोकरेज के यहां अल्गो ट्रेडिंग के वॉल्यूम में 12 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की। सूत्रों ने कहा कि कर विभाग को पूरे को-लोकेशन मामले पर मजबूत राजनीतिक समर्थन का शक है। बताया जाता है कि आयकर विभाग के पास पिछला ईमेल भी है, जो अप्रत्यक्ष जुड़ाव का संकेत दे रहा है और यह दावे का समर्थन भी करता है।
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