लेनदारों को मिले क्षतिपूर्ति अधिकार

अदिति दिवेकर | मुंबई Nov 21, 2017 09:52 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में सूचीबद्ध उच्च कर्ज वाली कंपनियों के प्रवर्तकों के खिलाफ वाकयुद्ध जारी रखते हुए जेएसडब्ल्यू समूह के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने आज कहा कि लेनदारों के लिए क्षतिपूर्ति के अधिकार के साथ निगरानी की मजबूत व्यवस्था संदिग्ध, इरादतन चूक करने वालों या असहयोग करने वाले डिफॉल्टरों को छोड़कर बाकी प्रवर्तकों के लिए रखी जानी चाहिए, जो इस प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं। जिंदल ने अपने ट्वीट में कहा, यह साख वाली आईबीसी प्रक्रिया के लिए झटका होगा अगर मौजूदा प्रवर्तक बैंकों को क्षतिपूर्ति के बिना भारी छूट के साथ संपत्तियां दोबारा अधिग्रहीत कर लेते हैं। सरकार को निश्चित तौर पर एनसीएलटी की प्रक्रिया की निगरानी करनी चाहिए।
 
इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि जब एनसीएलटी की प्रक्रिया शुरू की गई थी तो इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की भूमिका कंपनी के लिए सिर्फ समाधान योजना के अध्ययन, कारोबारी योजना की व्यवहार्यता और फैसला लेने तक सीमित थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों में पूरी प्रक्रिया कई संशोधन के चरण से गुजरी है और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल पर ज्यादा भार आ गया है, जो जांच निकाय की भूमिका भी निभा रहे हैं। 
 
7 नवंबर 2017 की विज्ञप्ति में नियामक दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) ने कहा है कि समाधान योजना में समाधान करने वाले आवेदक की विस्तृत जानकारी व अन्य संबंधित व्यक्तियों की जानकारी होनी चाहिए ताकि मंजूरी के लिए समाधान योजना पर विचार करते समय समिति ऐसे आवेदक व अन्य संबंधित व्यक्ति की साख का आकलन कर सके और सोचसमझकर फैसला ले सके।
 
खेतान ऐंड कंपनी के डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन पार्टनर दिवाकर माहेश्वरी ने कहा, हालिया संशोधन के जरिए अतिरिक्त जिम्मेदारी रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल पर डाल दी गई है, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है कि क्या वे समाधान की पूरी प्रक्रिया आईबीसी की तय समयसीमा में पूरा कर पाएंगे। इसलिए सरकार को इस समयसीमा पर दोबारा विचार कर सकती है ताकि अंतिम रूप दी गई समाधान योजना ठोस हो और आईबीसी के मसकद को पूरा करती हो।
 
आरबीआई ने जिन 12 कंपनियों की पहचान दिवालिया प्रक्रिया के लिए की है उनमें पांच स्टील क्षेत्र की हैं। यह पहला मौका नहीं है जब जिंदल ने एनसीएलटी की मौजूदा प्रक्रिया पर बोला हो। इस महीने जिंदल ने अधिकारियों से अर्ज किया था कि वह संदिग्ध प्रवर्तकों को पुनर्वास योजना पेश करने की अनुमति न दे, खास तौर से आईबीसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए।
 
लक्ष्मीकुमारन ऐंड श्रीधरन अटॉर्नीज के पार्टनर अबीर रॉय ने कहा, प्रवर्तकों पर पूरी पाबंदी सही तरीका नहीं होगा क्योंकि कुछ ऐसे प्रवर्तक हो सकते हैं जिन्होंने जानबूझकर डिफॉल्ट न किया होगा और ऐसे मामले में प्रवर्तकों को बोली लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि ऐसी पाबंदी शायद उत्पादक नहीं होगी और जोखिम लेने की उद्यमिता की प्रकृति के खिलाफ भी।
 
उन्होंने कहा, क्षतिपूर्ति के लिहाज से इसे हर मामले पर निर्भर होना पड़ेगा, हालांकि भविष्य में निगरानी की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है ताकि आईबीसी प्रक्रिया का दुरुपयोग न होना सुनिश्चित हो। एनसीएलटी ले जाई गई पांच स्टील कंपनियों मेंं से जेएसडब्ल्यू स्टील ने दो कंपनी मोनेट इस्पात और भूषण स्टील के लिए बोली लगाई है।
कीवर्ड JSW, NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),

  
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