हिस्सा बिक्री की खबर से प्रभावित होगी सुधार योजना?

सोहिनी दास | अहमदाबाद Nov 21, 2017 09:53 PM IST

दशकों पुरानी गुजरात मुख्यालय वाली आइसक्रीम निर्माता वाडीलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड परेशानियों का सामना कर रही है क्योंकि परिवार के एक सदस्य ने कंपनी की भविष्य की बढ़त की योजना में रोड़ा अटकाने की धमकी दी है। कंपनी की हालिया कोशिशों मसलन कर्ज में कमी, इन्वेंट्री की बेहतर योजना और वितरण में विस्तार से वाडीलाल का शेयर पिछले एक साल में बीएसई पर दोगुना हो गया है और सोमवार को यह 1,032 रुपये को छू गया। हालांकि एक प्रवर्तक की तरफ से हिस्सेदारी बिक्री की योजना और कंपनी से बाहर निकलने से जुड़ी खबर के बाद मंगलवार को कारोबार के दौरान यह टूटकर 991.9 रुपये का रह गया था।

 
निवेशकों की पसंदीदा सूची में इस शेयर के दोबारा आने की कई वजहें हैं। पहला, वाडीलाल ने साल 2015-16 में विनिर्माण क्षमता का विस्तार 3.5 लाख लीटर रोजाना से बढ़ाकर 4.6 लाख लीटर रोजाना कर दिया है, लिहाजा कंपनी ने पिछले तीन साल में 175 करोड़ रुपये से ज्यादा पूंजीगत खर्च का चक्र पूरा कर लिया है। दूसरा, इसने कर्ज का स्तर साल 2012-13 के 172.1 करोड़ रुपये से घटाकर 2015-16 में 121.7 करोड़ रुपये कर लिया है और अब इसकी योजना मौजूदा कर्ज को 100 करोड़ रुपये पर लाने की है और यह लंबी अवधि का कर्ज व अल्पावधि वाली कार्यशील पूंजी से जुड़ा कर्ज होगा। तीसरा, कंपनी ने वितरण में विस्तार पर दोबारा ध्यान केंद्रित किया है।
 
समझा जाता है कि वाडीलाल के गांधी भारत में आइसक्रीम क्षेत्र के अगुआ हैं। इन्होंने हस्तचालित मशीन व घर पर सुपुर्दगी वाला थर्मोकॉल बॉक्स ऐसे समय में शुरू किया जब देश में आइसक्रीम को बाजार के तौर पर नहीं पहचाना गया था। अभी भारत में आइसक्रीम उद्योग 6,000 करोड़ रुपये का है और यह सालाना 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है। मात्रा के लिहाज से वाडीलाल दूसरे स्थान पर है और कीमत के लिहाज से तीसरे पायदान पर। हालांकि परिवार की तीन पीढ़ी तब से एक साथ काम कर रही है जब वाडीलाल गांधी ने 1990 के दशक की शुरुआत में कारोबार शुरू किया था। 1999 में परिवार के सदस्यों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे कि कोई भी प्रवर्तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर किसी सूचीबद्ध कंपनियों या साझेदारी फर्मों में बिना लिखित संकल्पना के हिस्सेदारी नहीं बढ़ा सकता।
 
संस्थापक वाडीलाल गांधी के बेटों के पोते रामचंद्र (वीरेंद्र व राजेश) और उनके भाई लक्ष्मण के बेटे देवांशु की समान हिस्सेदारी है या वाडीलाल समूह की सभी कंपनियों में (असूचीबद्ध समेत) कुल प्रवर्तक हिस्सेदारी की करीब एक तिहाई। दो सूचीबद्ध इकाइयां हैं - वाडीलाल एंटरप्राइजेज लिमिटेड (जो आइसक्रीम बनाती है) और वाडीलाल इंडस्ट्रीज (जो उत्पाद बेचती है और इसके पास ब्रांड का मालिकाना हक है)। इन फर्मों में प्रवर्तक की हिस्सेदारी क्रमश: 51.3 फीसदी व 64.84 फीसदी है। रामचंद्र गांधी के अन्य बेटे शैलेश 1990 के दशक में पारिवारिक कारोबार से अलग हो गए और इनके पास महाराष्ट्र व दक्षिण भारतीय राज्यों में वाडीलाव के ब्रांड का क्षेत्रीय अधिकार है। 2014-15 में वीरेंद्र ने कंपनी लॉ बोर्ड से संपर्क कर दो अन्य प्रवर्तकों देवांशु व राजेश गांधी पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया। इस वजह से दोनों चचेरे भाई ने साल 2015 में दिल्ली में कंपनी लॉ बोर्ड का रुख किया।
 
उसके बाद से विवाद बढ़ता गया। इस साल अगस्त में खबर आई कि प्रवर्तकों ने अदालत से बाहर विवाद के निपटान पर सहमति जताई है। इसके बाद वाडीलाल का शेयर अगस्त के आखिर में 1,090 रुपये को छू गया, वहीं बाजार पूंजीकरण 784 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। विश्लेषकों ने कहा कि अगले तीन साल के लिए बड़े पूंजीगत खर्च की योजना नहीं है और कर्ज को हाल में उपयुक्त बनाया जाना जरूरत के आधार पर कार्यशील पूंजी जुटाने की गुंजाइश छोड़ता है। आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वाडीलाल वितरण पर न सिर्फ ध्यान बढ़ा रही है बल्कि अन्य श्रेणी के उत्पादों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
 
कंपनी प्रसंस्कृत खाद्य विभाग पर वास्तव में ध्यान दे रही है और इसके नतीजे आने लगे हैं। राजस्व में निर्यात का योगदान पहली तिमाही में 7.2 फीसदी के मुकाबले 9.5 फीसदी पर पहुंच गया है। वीरेंद्र की तरफ से हिस्सेदारी बिक्री और कंपनी से बाहर निकलने की खबर के बाद इस पर अनिश्चितता है कि क्या राजेश या देवांशु इसे खरीदेंगे या बाहरी निवेशक आएंगे। 
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