एसऐंडपी ने नहीं बदला मूड

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Nov 24, 2017 10:04 PM IST

मूडीज के उलट स्टैंडर्ड ऐंड पुअर्स (एसऐंडपी) ने भारत की सॉवरिन रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ न्यूनतम निवेश श्रेणी पर बरकरार रखा है। रेटिंग एजेंसी ने इसके लिए भारत में खासकर राज्यों की कमजोर राजकोषीय स्थिति, सरकार पर ज्यादा कर्ज का बोझ और कम प्रति व्यक्ति आय को जिम्मेदार ठहराया है। एजेंसी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भाजपा मजबूत बनकर उभरेगी। उसने साथ ही अनुमान जताया है कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों को फंसी परिसंपत्तियों के ऋण पर भारी कटौती और बेसल-3 मानकों को पूरा करने के लिए 30 अरब डॉलर की जरूरत होगी। 
 
एसऐंडपी ने भारत की रेटिंग बीबीबी- पर बरकरार रखी है जो जंक से एक पायदान ऊपर है और मूडीज की रेटिंग से एक पायदान नीचे है। एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में कई सकारात्मक बातें भी कही हैं। उसका कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी क्रियान्वयन के कारण दो तिमाहियों में जीडीपी में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने के बावजूद 2018-20 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार में भी लगातार बढ़ोतरी होगी।
 
स्थायी परिदृश्य का मतलब है कि मौजूदा रेटिंग को सपोर्ट कर रहे सकारात्मक और नकारात्मक कारक संतुलित हैं। मूडीज ने भी भारतीय परिदृश्य को स्थायी बताया है। एसऐंडपी ने कहा, 'स्थायी परिदृश्य हमारे इस दृष्टिïकोण को परिलक्षित करता है कि अगले दो साल भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत बनी रहेगी और राजकोषीय घाटा हमारी अपेक्षा के अनुरूप रहेगा।' एजेंसी के मुताबिक अगर सरकार के सुधारों से राजकोषीय स्थिति बेहतर होती है और कर्ज घटता है तो रेटिंग को अपग्रेड किया जा सकता है। लेकिन अगर जीडीपी की वृद्घि निराश करती है और राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है तो रेटिंग में गिरावट आ सकती है। साथ ही अगर सुधारों पर सरकार सुस्त पड़ती है तो रेटिंग प्रभावित हो सकती है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि केंद्र और राज्यों के स्तर पर खर्च के मौजूदा दबाव को देखते हुए राजकोषीय मजबूती की चाल सुस्त रहेगी।
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