क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के शेयरों की फीकी पड़ी चमक

हंसिनी कार्तिक | मुंबई Nov 30, 2017 09:47 PM IST

मजबूत ऋण वृद्घि न सिर्फ बैंकों के लिए बल्कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए भी जरूरी है। दरअसल, ऋणों के लिए मांग ही उनका मूल खजाना है। इसलिए, सब कुछ अच्छा चल रहा था और क्रिसिल, केयर रेटिंग्स और इक्रा के शेयरों की मांग बनी हुई थी। लेकिन पिछले कुछ समय से इनकी चमक फीकी पडऩे लगी है। पिछले 12 महीनों में इन शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कमजोर रहा है। कमजोर ऋण मांग और आम बजट के बाद छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए रेटिंग सब्सिडी में 80 प्रतिशत कमी की दोहरी समस्या से जून तिमाही के बाद से इनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ है।
 
क्रिसिल पर ज्यादा दबाव पड़ा है और सितंबर तिमाही में इसके राजस्व में महज 5.6 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। कंपनी के कुल राजस्व में लगभग दो-तिहाई का योगदान रखने वाले शोध खंड ने हाल के समय में धीमी वृद्घि दर्ज की है, क्योंकि वैश्विक बैंक नियामकीय फीडबैक का आकलन करने की प्रक्रिया में व्यस्त हैं। विपरीत मौद्रिक हलचल से भी इस सेगमेंट का राजस्व प्रभावित हुआ है। रेटिंग व्यवसाय एसएमई से धीमी मांग की वजह से सालाना आधार पर महज 3 फीसदी बढ़ा। क्रिसिल ने एसएमई व्यवसाय में अपने कर्मियों की संख्या में कमी की जिससे उसे विपरीत परिस्थिति में इस सेगमेंट के मुनाफे में सुधार लाने में मदद मिली है। फिर भी कैलेंडर वर्ष 2018 में ऋण वृद्घि धीमी बने रहने की आशंका को देखते हुए आईआईएफएल के विश्लेषकों ने क्रिसिल के लिए कैलेंडर वर्ष 2018 और 2019 के लिए अपने आय अनुमानों में 5 प्रतिशत तक की कटौती की है।
 
आय अनुमान में कमी या वित्तीय प्रदर्शन के संदर्भ में कमजोरी की बात हो तो भारत की सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ऐसी अकेली कंपनी नहीं है। देश की दूसरी सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी केयर भी अपना 98 प्रतिशत राजस्व रेटिंग व्यवसाय से प्राप्त करती है। इसे भी दूसरी तिमाही में दबाव का सामना करना पड़ा है। केयर का समायोजित राजस्व महज तीन फीसदी से अधिक की क्षेत्रीय वृद्घि दर का प्रतीक है। 
 
एजेंसी को दूसरी तिमाही के दौरान कुल ग्राहक संख्या में  सालाना आधर पर 23 फीसदी की वृद्घि दर्ज किए जाने के बावजूद राजस्व पर दबाव का सामना करना पड़ा है। आईसीआरए का प्रदर्शन कुछ बेहतर है। इसके रेटिंग खंड का दूसरी तिमाही का राजस्व 6 फीसदी बढ़कर 56 करोड़ रुपये रहा। हालांकि तिमाही के दौरान उसकी सूचना प्रौद्योगिकी इकाई की बिक्री के समायोजन के साथ कुल राजस्व वृद्घि 2 फीसदी रही, क्योंकि उसकी आउटसोर्सिंग सेवा और कंसल्टिंग इकाई का प्रदर्शन भी खराब रहा। 
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