ज्यादातर शेल कंपनियां पाक-साफ

श्रीमी चौधरी | मुंबई Dec 07, 2017 09:17 PM IST

हुई जांच, ज्यादा पर नहीं आई आंच

331 कंपनियों में से सिर्फ 10-12 के खिलाफ फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए गए, जो अब भी संदेह के घेरे में हैं
रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद सेबी ने एनएसई में सूचीबद्ध 48 कंपनियों में से सिर्फ दो को चुना और इनके खिलाफ ऑडिट का निर्देश दिया
बीएसई में सूचीबद्ध 162 कंपनियों में से सिर्फ आठ कंपनियां ही फॉरेंसिक ऑडिट के पात्र मानी गई
सैट से राहत पाने वाली 12 कंपनियों को छोड़कर एनएसई ने सत्पापन के लिए 36 कंपनियों से दस्तावेज मांगे थे

संदिग्ध शेल कंपनियों (331 कंपनी) का कारोबार निलंबित करने के तीन महीने बाद बाजार नियामक सेबी ने सिर्फ 10-12 कंपनियों के फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए आगे जांच का फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, स्टॉक एक्सचेंजों ने इन फर्मों की तरफ से मुहैया कराए गए दस्तावेज और बाजार नियामक सेबी के पास जमा कराई गई रिपोर्ट की जांच की है। रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद सेबी ने एनएसई में सूचीबद्ध 48 कंपनियों में से सिर्फ दो को चुना और इनके खिलाफ ऑडिट का निर्देश दिया। वहीं बीएसई में सूचीबद्ध 162 कंपनियों में से सिर्फ आठ कंपनियां ही फॉरेंसिक ऑडिट के पात्र मानी गई। 

सूत्रों ने कहा, बाकी को उनके दस्तावेज के सत्यापन के बाद इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई है। एक सूत्र ने कहा, सैट से राहत पाने वाली 12 कंपनियों को छोड़कर एनएसई ने सत्पापन के लिए 36 कंपनियों से दस्तावेज मांगे थे। इनमें ऑडिटर का प्रमाणपत्र, तीन साल का सालाना आयकर रिटर्न और लंबित कर विवाद शामिल हैं। कंपनियों को कंपनी अधिनियम व सेबी के सूचीबद्धता नियम के अनुपालन पर स्थिति रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए भी कहा गया। दस्तावेजों की जांच के बाद कंपनी को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया गया। तथ्यों के आधार पर सेबी को आगे के कदम के लिए रिपोर्ट सौंप दी गई।

इस बीच, एक्सचेंजों ने फॉरेंसिक ऑडिट के लिए ऑडिटरों की समिति नियुक्त किया था। सूत्रों ने कहा कि चुनी गई कंपनियों का अंकेक्षण पूरा करने में कुछ महीने लगेंगे। एनएसई के प्रवक्ता ने एक ईमेल के जवाब में कहा, 331 कंपनियों में से 48 कंपनियां एनएसई में सूचीबद्ध हैं। इनमें से अभी 34 कंपनियां सक्रिय हैं और 14 कंपनियां निलंबन की स्थिति में हैं। सेबी ने एनएसई को दो कंपनियों एआरएसएस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नू टेक इंडिया के खिलाफ फॉरेंसिक ऑडिट का निर्देश दिया है। बाकी 22 कंपनियों की तरफ से जमा कराए गए दस्तावेजों की जांच जारी है।

इस बारे में जानकारी के लिए सेबी व बीएसई को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। विशेषज्ञों ने कहा, ये नतीजे आश्चर्यचकित नहीं करते क्योंकि सेबी की तरफ से शुरू की गई कार्रवाई किसी तरह की जांच या नतीजे के आधार पर नहीं थी। प्रॉक्सी फर्म इनगवर्न के प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, निलंबन का सेबी का कदम यह नहीं बता पा रहा है कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने आखिर किस आधार पर इन कंपनियों को शेल कंपनियों के तौर पर वर्गीकृत किया है। इससे संबंधित कंपनियों के हितधारकों के बीच भ्रम पैदा हुआ है। सेबी को यह बताना चाहिए कि आखिर किस मानदंड या आधार पर इन कंपनियों के शेल कंपनी बताया जा रहा है। इन कंपनियों और खास तौर से अल्पांश शेयरधारकों के लिए यह अनुचित है।7 अगस्त को बाजार नियामक ने एक्सचेंजों को संदिग्ध कंपनियों को निलंबित करने का आदेश दिया था। कंपनी मामलोंं के मंत्रालय ने 331 संदिग्ध शेल कंपनियों की पहचान की थी। 
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