टाटा संस को सूचीबद्ध कराने पर रतन व साइरस की अलग-अलग राय

देव चटर्जी | मुंबई Dec 12, 2017 09:52 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाने की योजना का विरोध करने वाली याचिका पर जनवरी की शुरुआत में सुनवाई करेगा। एनसीएलटी के सामने रखे गए दस्तावेज के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में मिस्त्री व टाटा के बीच शुरू हुई रस्साकशी के ठीक पहले दोनों की टाटा संस की रकम जुटाने की योजना पर अलग-अलग राय थी। साथ ही इस साल टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाने की योजना पर इनकी राय जुदा रही।
 
जून 2016 में रतन ने टाटा संस के तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था जिसमेंं उन्होंने टाटा संस के शेयरधारकों को बोनस शेयर जारी करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इससे पैरेंट कंपनी पर अतिरिक्त देनदारी हो जाएगी। वास्तव में साल 2014 से टाटा का मानना रहा है कि टाटा संस को विदेशी सूचीबद्धता के साथ डिफरेंशियल वोटिंग राइट्स (डीवीआर) जारी करना चाहिए ताकि कंपनी अपने दायित्व पूरी कर सके। 13 जून 2016 को मिस्त्री को लिखे पत्र में टाटा ने कहा था कि टाटा संस के बोनस इश्यू से 300-350 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।  टाटा मिस्त्री के सुझाव पर जवाब दे रहे थे जिसमें मिस्त्री ने कहा था कि रकम जुटाने के लिए या तो टीसीएस के शेयर बेच दिए जाएं या फिर बोनस शेयर जारी किए जाएं।
 
टाटा ने कहा कि शेयरधारकों को कुछ वापस किए जाने वाले किसी प्रस्ताव को सिर्फ इस आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता कि कंपनी के पास काफी नकदी है और इस पर कोई कर्ज नहीं है। टाटा ने कहा, टीसीएस के मामले में हमने इस पर बहस की और आमसहमति बनी कि ऐसा करने का सबसे आसान तरीका शेयरधारकों को ज्यादा या विशेष लाभांश देना है, लेकिन टाटा संस उपरोक्त मानदंडों पर खरा नहीं उतरती। टाटा संस और मिस्त्री परिवार ने टिप्पणी करने से मना कर दिया।
 
दस्तावेज के मुताबिक, टाटा ने टाटा संस को अक्टूबर 2014 में डीवीआर के साथ विदेश में सूचीबद्ध कराने का सुझाव दिया था, लेकिन इस प्रस्ताव को मिस्त्री का समर्थन नहींं मिला, जिन्होंने कहा कि डीवीआर और टाटा संस के होल्डिंग कंपनी के दर्जे से परिसंपत्तियों की वास्तविक कीमत 30 फीसदी कम होगी। मिस्त्री ने टाटा को 18 जून को जवाब भेजा। इसमें कहा गया कि टाटा संस की अंतर्निहित परिसंपत्तियों पर 20 फीसदी से ज्यादा छूट से इसके शेयरधारकों को आर्थिक नुकसान होगा। 
कीवर्ड tata sons, NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),

  
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