प्रायोजक की शेयरधारिता सीमा में हो इजाफा

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Dec 17, 2017 09:37 PM IST

संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों (एआरसी) ने सरकार से ऐसी कंपनियों के प्रायोजक की शेयरधारिता में इजाफा करने का अनुरोध किया है। इस कदम से रणनीतिक निवेशकों मसलन प्राइवेट इक्विटी फंड और अर्थपूर्ण भूमिका के निर्वहन के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं। इन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि दबाव वाली कंपनियों के एनपीए खरीद के अलावा उन्हें ऐसी कंपनियों को उधार देने या उनके शेयर खरीदने की अनुमति दी जाए।
 
एआरसी के मुताबिक, किसी संपत्ति पुनर्गठन कंपनी का प्रायोजक माने जाने वाले किसी व्यक्ति की शेयरधारिता सीमा 10 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी की जानी चाहिए। सरफेसी अधिनियम के मौजूदा प्रावधानों के तहत एक प्रायोजक पर एआरसी के परिचालन से जुड़ी कुछ निश्चित जवाबदेही व देनदारी होती है और उन्हें विशिष्ट पात्रता शर्तें पूरी करनी होती है। यह कभी-कभी प्राइवेट इक्विटी फंड जैसे रणनीतिक निवेशकों को एआरसी में ठीक-ठाक अल्पांश हिस्सेदारी लेने से हतोत्साहित करता है क्योंकि उन्हें प्रायोजक के तौर पर वर्गीकृत होने का डर रहता है।
 
एनबीएफसी के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों में रणनीतिक निवेशक को केंद्रीय बैंंक की मंजूरी के बिना 26 फीसदी तक हिस्सेदारी लेने की अनुमति है। हालांकि एआरसी को लेकर केंद्रीय बैंक के दिशानिर्देशों में एआरसी की 10 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने वाले निवेशक प्रायोजक बन जाते हैं। इसके लिए आरबीआई की अनुमति लेनी होती है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर भाविन शाह ने कहा, 10 फीसदी की मौजूदा सीमा काफी कम है और रणनीतिक निवेशकों से रकम जुटाने में एआरसी को मदद करने की खातिर इस सीमा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
 
खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सिद्धार्थ शाह ने कहा, एआरसी को पूंजीकृत किए जाने की तत्काल जरूरत है, खास तौर से अगर उन्हें कुल सिक्योरिटी रिसीट्स के 15 फीसदी हिस्से तक फंड लाना हो। छूट से रणनीतिक या वित्तीय निवेशकों को एआरसी में ठीक-ठाक हिस्सेदारी लेने की अनुमति में मदद मिलेगी। एआरसी चाहती है कि सरकार उन्हें दबाव वाली कंपनियों को उधार देने या उनके शेयरों में निवेश की अनुमति दे। इसमें दबाव वाली कंपनियों को प्राथमिकता वाली ऋण फंडिंग और दिवालिया संहिता के दायरे वाली दबाव वाली कंपनियोंं को अंतरिम वित्त की सुविधा शामिल है।
 
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब एनसीएलटी में दिवालिया याचिका स्वीकार हो जाती है तो ऋण के भुगतान के मामले में वित्त मुहैया कराने वालों के लिए अंतरिम वित्त मुहैया कराना मुश्किल हो जाता है। सिद्धार्थ ने कहा, ऐसी जरूरतें पूरी करने के मामले में एआरसी बेहतर स्थिति में होंगी, जो मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित है। साथ ही आईबीसी के दायरे में आने से पहले संपत्ति के स्तर पर किसी तरह के पुनर्गठन में वित्त मुहैया कराने और इकाई के पुनर्गठन के अलावा नया कर्ज मुहैया कराने में एआरसी को मौका देने से समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी। अनुमान है कि एआरसी 15-85 सिक्योरिटी रिसीट्स मॉडल में कटौती कर नकदी आधारित एनपीए अधिग्रहण बढ़ाएगी। 15:85 योजना के तहत बैंकों को एआरसी को की गई बिक्री से मिलने वाली रकम का 15 फीसदी नकद मिलता है जबकि बाकी सिक्योरिटी रिसीट्स में निपटाया जाता है, जिसे रकम की रिकवरी के बाद भुनाया जा सकता है।
कीवर्ड share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक