बिटकॉइन से अभी खतरा नहीं लेकिन ना हो लापरवाही: सेबी

बीएस संवाददाता | मुंबई Dec 20, 2017 10:19 PM IST

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं और भारतीय बाजारों के लिए फिलहाल इनसे कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है। हालांकि इसे लेकर तेजी से उभर रहे परिदृश्य की अनदेखी नहीं की जा सकती। सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने सीआईआई फाइनैंशियल मार्केट्ïस समिट में कहा, 'बिटकॉइन से फिलहाल कोई प्रणालीगत खतरा पैदा नहीं हुआ है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी, दोनों मंत्रालय इसे लेकर आरबीआई के साथ विचार-विमर्श की संभावना तलाश रहे हैं।'

बिटकॉइन और अन्य वर्चुअल मुद्राएं निवेशक समुदाय के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस साल इनकी कीमतों में भारी तेजी आई है। हालांकि मौजूदा समय में, निवेशकों के लिए इन नए जमाने की मुद्राओं में सौदों पर निगरानी के लिए कोई नियम-कानून नहीं हैं।  

त्यागी ने कहा, 'हम सेटलमेंट मानकों पर पुनर्विचार कर रहे हैं और इन्हें आसान बनाने के लिए कुछ खास प्रावधानों में संशोधन शुरू किया है।' विश्लेषकों का कहना है कि कंसेंट सेटलमेंट मानकों को आसान बनाए जाने से बाजार नियामक के पास बड़ी तादाद में लंबित मामलों के प्रबंधन में मदद मिलेगी। मौजूदा समय में भेदिया कारोबार और टेकओवर कोड संबंधित उल्लंघनों को कंसेंट सेटलमेंट रूट से अलग रखा गया है। विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में नियामक कंसेंट रूट के जरिये किसी भी तरह के सेटलमेंट की अनुमति दे सकता है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा नियामक को व्यवसाय आसान बनाने के लिए निवेशक सुरक्षा और दंडात्मक कार्रवाई के बीच संतुलन कायम करने की जरूरत होगी। त्यागी ने कहा, 'सेबी प्रवर्तन हिस्से का पूरी तरह से कायाकल्प करने की कोशिश कर रहा है। हमें ऐसे मामले अपने हाथ में नहीं लेने चाहिए जिनका हम प्रबंधन नहीं कर सकते। नियामक अपनी क्षमता के आधार पर खामियां तलाशेगा।'

कॉरपोरेट शासन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नियामक कॉरपोरेट गवर्नेंस रिपोर्ट में सेबी की विशेषज्ञ समिति द्वारा चिन्हित की गई सभी सिफारिशों की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हम कंपनी मामलों के मंत्रालय और अन्य नियामकीय संस्थाओं के साथ परामर्श के बाद अंतिम निर्णय लेंगे। प्रमुख कंपनीज ऐक्ट के विपरीत जाने का कोई सवाल ही नहीं है।'

इसके अलावा सेबी प्रमुख ने नो यॉर कंपनी (केवाईसी) अवधारणा का भी जिक्र किया जिसे 2014-15 में घोषित किया गया। सेबी का मानना है कि केवाईसी को आसान बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्थायी खाता संख्या और बायोमेट्रिक आधार पर आधारित हो सकती है। 

त्यागी ने कहा कि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का वित्तीय बाजारों में इस्तेमाल होने की संभावना है। यह टेक्नोलॉजी ऐसा डिजिटल लेजर है जिसका इस्तेमाल बिटकॉइन के स्वामित्व का पता लगाने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा, 'ब्लॉकचेन ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसका हर कोई इस्तेमाल करेगा। इसे लेकर कोई नियामकीय निगरानी नहीं है और इसे प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। हम ब्लॉकचेन के इस्तेमाल को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं और इसके विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन कर रहे हैं।' सरकार द्वारा यह निर्धारित किया जाना बाकी है कि बिटकॉइन मुद्रा है या कमोडिटी।

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