यूनिटेक के दूरसंचार व्यवसाय का दुखद अंत

किरण राठी |  Dec 21, 2017 10:11 PM IST

रियल एस्टेट दिग्गज यूनिटेक ने वर्ष 2008 में दूरसंचार उद्योग में प्रवेश किया था। तब इसकी सहायक इकाई यूनिटेक वायरलेस ने तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा द्वारा निर्धारित 'पहले आओ, पहले पाओ नीति' के आधार पर 1,650 करोड़ रुपये में पूरे भारत में दूरसंचार लाइसेंस खरीदे थे। दूरसंचार मंत्रालय ने वर्ष 2001 की कीमतों पर 22 इकाइयों को 122 दूरसंचार लाइसेंस जारी किए थे और यूनिटेक ने अपनी सहायक इकाइयों के जरिये देश के सभी 22 दूरसंचार सर्किलों में स्पेक्ट्रम खरीदा था।

 
स्पेक्ट्रम खरीदने के बाद कंपनी ने यूनिनोर के साथ संयुक्त उपक्रम बनाने के लिए नॉर्वे की दूरसंचार कंपनी टेलीनोर से हाथ मिलाया था और वर्ष 2009 के अंत तक सात सर्किलों में सेवाएं शुरू कर दी गई थीं। यूनिटेक ने यूनिनोर में 67.25 फीसदी हिस्सेदारी 6,120 करोड़ रुपये में टेलीनोर को बेच दी थी जिसका मूल्यांकन लगभग 9,000 करोड़ रुपये पर किया गया था। हालांकि, यूनिनोर के पास दूरसंचार लाइसेंस के अलावा कोई परिसंपत्ति नहीं थी। ये लाइसेंस उसने 1,650 करोड़ रुपये में खरीदे थे। 
 
ये आरोप लगाए गए कि यूनिटेक दूरसंचार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए योग्य नहीं थी और कंपनी ने धोखाधड़ी से ये लाइसेंस हासिल किए थे। वर्ष 2009 में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में हुई अनियमितताओं की जांच निर्देश दिया था और बाद में 2010 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा एक रिपोर्ट में 2जी घोटाले का पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया। ऑडिटर ने कहा कि स्पेक्ट्रम की कम कीमत पर बिक्री से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ और यूनिटेक समेत कई कंपनियों को इस बिक्री से फायदा हुआ था।
 
फरवरी 2012 में 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन के संबंध में जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने 122 लाइसेंस रद्द कर दिए थे जिनमें एक राजा द्वारा स्वीकृत किए गए यूनिनोर के लाइसेंस भी शामिल थे। इस घटनाक्रम के बाद छापेमारी की गई और कई अधिकारियों और राजनीतिज्ञों को हिरासत में लिया गया था। यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा भी इनमें शामिल थे।
 
चंद्रा कई महीने तक जेल में रहे। हालांकि रिहा होने के बाद उन्हें उनके भाई अजय चंद्रा के साथ इस साल दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गुरुग्राम में एक परियोजना में खरीदारों को धोखा देने के आरोप में फिर से गिरफ्तार किया गया था। चंद्रा फिलहाल उनकी कंपनी यूनिटेक के खिलाफ धोखाधड़ी के कई मामलों के संबंध में तिहाड़ जेल में हैं। 
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