फंड उद्योग संकट से निपटने को तैयार

चंदन किशोर कांत | मुंबई Dec 22, 2017 09:48 PM IST

म्युचुअल फंड (एमएफ) के अधिकारियों ने 23 लाख करोड़ रुपये के घरेलू परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में जोखिम प्रबंधन प्रणालियों को लेकर चिंताओं के स्तर को कम कर दिया है।  हाल में बाजार नियामक सेबी के वरिष्ठï अधिकारियों ने इस सेक्टर को चेतावनी देते हुए पर्याप्त तरलता के बीच अनुशासित रहने को कहा था।  उद्योग की कंपनियों का कहना है कि उन्हें 2008 के कड़वे अनुभव से सीख मिली है और वे इसकी पुनरावृत्ति टालने के लिए बेहतर स्थिति में हैं। 
 
इस महीने के शुरू में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य जी महालिंगम ने सीआईआई के एक सम्मेलन में कहा था, 'हमें इस सोच को दूर करने की जरूरत है कि नकदी की पर्याप्तता हमें बचाए हुए है। यह अच्छा समय है, इसलिए हमें कुछ अच्छी कार्य प्रणालियों, सिद्घांतों और अनुशासन तंत्र का क्रियान्वयन शुरू कर देना चाहिए जिससे कि हम बुरे समय का आसानी से मुकाबला कर सकें और निवेशक आसानी से उद्योग के साथ जुड़े रहें।' पूर्व में आरबीआई से जुड़े रहे महालिंगम ने उद्योग से न्यूनतम पूंजी, नुकसान को खपाने की क्षमता, नकदी प्रबंधन, लेवरेज रेशियो, रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न और कमीशन ढांचे जैसे मानकों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। 
 
संकेत स्पष्टï था कि परिसंपत्तियों और निवेशकों को तेजी से जोड़ रहा म्युचुअल फंड उद्योग मूल सिद्घांतों से भटकना नहीं चाहिए। बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस मुद्दे पर उद्योग के अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन बातचीत के दौरान कोई भी अपनी पहचान बताने को तैयार नहीं हुआ। एक बड़े फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'नियामक की चिंताएं काफी हद तक उचित हैं। यह क्षेत्र पिछले एक दशक के दौरान कई बदलावों से गुजरा है। 2008 के वित्तीय संकट का सबक खास रहा है और उस संकट की पुनरावृत्ति को टालने के लिए हरसंभव कोशिश की जा रही है। निवेश के संदर्भ में निवेशकों के रुख में बड़ा बदलाव आया है। मजबूत निवेश प्रवाह को देखते हुए हम सतर्क हैं और हमने वितरकों और सलाहकारों के साथ अपना जुड़ाव स्तर (आंतरिक और बाहरी तौर पर) मजबूत बनाया है।'
 
उन्होंने कहा कि गलत जानकारी देकर बिक्री की समस्या को इस क्षेत्र द्वारा हाल के वर्षों के दौरान काफी हद तक दूर किया गया है, लेकिन अभी इस संदर्भ में लंबी दूरी तय की जानी बाकी है।  मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'निवेशकों के साथ जुड़ाव अहम है। इस दिशा में प्रयास बरकरार रहेंगे। मैं निजी तौर पर पूरे क्षेत्र में कई निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल हो रहा हूं। पहले जैसे संकट के मामले में, म्युचुअल फंड सेक्टर उसकी पुनरावृत्ति को टालने के लिए बेहतर स्थिति में है।'
 
2004-2008 की मंदी के दौरान किए गए एकमुश्त और भारी निवेश के बजाय निवेशक मौजूदा समय में म्युचुअल फंडों में निवेश के लिए सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) विकल्प को अधिक पसंद कर रहे हैं।  शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि जब बात प्रतिफल की हो तो यह ऐसा समय है जब निवेशकों को अपनी उम्मीदें कम रखनी चाहिए। उनका कहना है कि जोखिम-समायोजन के कारक को हमेशा प्राथमिकता दी गई है और आगे भी इसका ध्यान रखा जाना चाहिए। 
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