नए साल में फंडों से कुछ कम प्रतिफल की उम्मीद

चंदन किशोर कांत | मुंबई Dec 27, 2017 09:53 PM IST

भारत का 23 लाख करोड़ रुपये का म्युचुअल फंड उद्योग वर्ष 2018 में वृद्घि की मजबूत राह पर कायम रह सकता है। हालांकि फंड प्रबंधकों द्वारा निवेशकों से प्रतिफल को लेकर थोड़ी कम उम्मीद रखने को कहा जा रहा है। फंड प्रबंधकों का कहना है कि 2018 में प्रतिफल 2017 के 30 फीसदी की तुलना में 18 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। म्युचुअल फंड क्षेत्र के प्रमुख फंड प्रबंधकों के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक रहेगा और साथ ही कई बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फंड प्रबंधकों द्वारा इस तरह की सतर्कता ऐसे समय में बरती गई है जब घरेलू और वैश्विक दोनों स्तर पर वृहद आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं जिनसे अगले साल बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है।
 
रिलायंस कैपिटल में इक्विटीज के वैश्विक प्रमुख सुनील सिंघानिया कहते हैं, 'जहां तक वृहद कारकों का सवाल है तो वर्ष 2018 चुनौतीपूर्ण वर्ष रहेगा। वैश्विक रूप से बढ़ती ब्याज दरों के परिदृश्य और भारत में तटस्थ ब्याज दरों की संभावना को देखते हुए मेरा मानना है कि बाजार अधिक अस्थिर रहेंगे। निवेशकों को 18 प्रतिशत से कम (मिड-टीन) प्रतिफल की ही उम्मीद रखनी चाहिए।'
 
यह गौर करने की बात है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कॉरपोरेट आय उस रफ्तार से नहीं बढ़ी है जितनी कि फंड प्रबंधकों ने उम्मीद की थी। हालांकि वे इसे लेकर आशान्वित हैं कि वर्ष 2018-19 में आय में बड़ा सुधार आएगा और वृहद कारकों का प्रभाव दूर होगा। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्युचुअल फंड के सह-प्रमुख निवेश अधिकारी (सीआईओ) महेश पाटिल कहते हैं, 'दो कारकों ने हमें वर्ष 2018 में आशान्वित बना दिया है। नोटबंदी और जीएसटी क्रियान्वयन के दोहरे दबाव के बाद आर्थिक सुधार में तेजी आनी चाहिए। यह सुधार काफी हद तक निजी खपत पर केंद्रित होगा, जबकि पूंजीगत खर्च और निर्यात से भी मदद मिलेगी। दूसरी बात, हम कॉरपोरेट आय में सुधार देख रहे हैं और यह सुधार सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से आएगा। हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 का अंत निफ्टी 50 कंपनियों की आय वृद्घि के संदर्भ में 10 प्रतिशत और 19 प्रतिशत की वृद्घि के साथ होगा।'
 
हालांकि पाटिल का कहना है कि भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई में तेजी के स्वरूप में कई समस्याएं हैं जिससे केंद्रीय बैंकों को नीतिगत दरें सख्त बनाने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। वह कहते हैं, '3-5 साल की अवधि के साथ बाजारों में मिड-टीन प्रतिफल की उम्मीद के साथ निवेश करना फायदेमंद रहेगा।' फंड प्रबंधकों की सलाह है कि निवेशकों को बाजारों में आगामी अस्थिरता से मुकाबले के लिए पोर्टफोलियो से खास आवंटन रणनीति के साथ बैलेंस्ड फंडों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यदि कोई निवेशक इक्विटी योजनाओं को पसंद करता है तो उसे लार्ज कैप योजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। 
 
भारत के सबसे बड़े फंड हाउस आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड के सीआईओ एसे नरेन का मानना है कि घरेलू मोर्चे पर आय में सुधार की लगातार धीमी रफ्तार के बीच वैश्विक घटनाक्रम की अनिश्चितता को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे अल्पावधि में बाजार में अस्थिरता देखी जा सकती है।  
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