उधारी बढऩे से प्रतिफल पर दबाव

अनूप रॉय और समी मोडक | मुंबई Dec 27, 2017 09:55 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरी पांच नीलामी को पुनर्समायोजित कर 15,000-15,000 करोड़ रुपये कर दिया, जो पहले 5,000-5,000 करोड़ रुपये थी ताकि इस वित्त वर्ष में सरकार की 50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी को शामिल किया जा सके। अतिरिक्त उधारी की संभावना को देखते हुए बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन भी बाजार सूचकांकों के मुकाबले कमजोर रहा है। बाजार को मोटे तौर पर 30,000 करोड़ रुपये से लेकर 50,000 करोड़ रुपये की उधारी की उम्मीद है। वास्तव में बॉन्ड के डीलर नहीं मान रहे हैं कि आखिरी पांच नीलामी 5,000-5,000 करोड़ रुपये की होगी। सामान्य तौर पर साप्ताहिक उधारी का आकार हमेशा से ही कम से कम 15,000 करोड़ रुपये का होता है।
 
सरकार भी ट्रेजरी बिल के जरिए 1.79 लाख करोड़ रुपये की उधारी ले रही है, जो 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन वाले ट्रेजरी बिल के जरिए होगी और यह 3 जनवरी से शुरू होगी। इनमें से कोई भी मार्च से पहले परिपक्व नहीं होगा, जिसका मतलब यह हुआ कि बाजार पर दबाव बना रहेगा और यह ऐसे समय में प्रतिफल पर दबाव बनाएगा जब तेल की कीमतें बढ़त की राह पर हैं।
 
उधारी की घोषणा बाजार बंद होने के बाद हुई, लेकिन बंद होने से पहले बाजार ने इस कयास पर प्रतिक्रिया जताई कि अतिरिक्त उधारी करीब 30,000 करोड़ रुपये की होगी, जो बाजार अनुमान के निचले स्तर पर होगा। ऐसे में प्रतिफल तीन आधार अंक फिसल गया। अगर अतिरिक्त उधारी बाजार अनुमान के ऊपरी स्तर पर हो तो इसका मतलब 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल दोबारा 7.30 फीसदी के पास आ जाएगा। यह कहना है डीलरों का। फस्र्ट रैंड बैंक के ट्रेजरी प्रमुख हरिहर कृष्णमूर्ति ने कहा, धीरे-धीरे प्रतिफल इस उम्मीद में बढ़कर 7.40 फीसदी पर जा सकता है कि बॉन्ड की आपूर्ति इसके बाद भी जारी रहेगी कि स्थानीय बॉन्डों में विदेशी निवेशकों की जगह पहले ही भरी जा चुकी है।
 
10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति का प्रतिफल बुधवार को कारोबार के दौरान बढ़कर 7.31 फीसदी पर जा पहुंचा। हालांकि बाद में यह दिन के निचले स्तर 7.22 फीसदी के आसपास बंद हुआ, जबकि एक दिन पहले यह 7.27 फीसदी पर बंद हुआ था। एक वरिष्ठ बॉन्ड डीलर ने कहा, बाजार को अनुमान था कि आखिरी पांच नीलामी को दोबारा समायोजित किया जाएगा। लेकिन प्रतिफल बढ़ेगा क्योंकि यह उससे अलग है जब वास्तव में इसकी घोषणा होगी।
 
डीलरों ने कहा कि सरकार की अतिरिक्त उधारी ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब रेटिंग एजेंसी ने भारत की रेटिंग को उन्नत किया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की छवि के लिए यह ठीक नहीं है। यह बाजार से सस्ते में रकम जुटाने की कुछ निजी कंपनियोंं की कोशिश पर असर डाल सकता है। हालांकि डीलरों ने कहा कि सरकार ने आखिरी पांच नीलामी के बारे में पर्याप्त संकेत नहींं दिए हैं कि अतिरिक्त उधारी 50,000 करोड़ रुपये के आसपास होगी। लेकिन ट्रेजरी उधारी का बाजार ने अनुमान नहीं लगाया था। दिसंबर तिमाही मेंं सरकार ने ट्रेजरी बिल के जरिए 1.43 लाख करोड़ रुपये उधार लिए हैं। बॉन्ड का प्रतिफल अगस्त से ही बढ़ रहा है जबकि उस महीने दरों में कटौती हुई थी और भारतीय रिजर्व बैंक ने नकदी पर आश्वासन भी दिया था। अगस्त में हुई कटौती के बाद से प्रतिफल 80 आधार अंक से ज्यादा बढ़ चुका है क्योंंकि बाजार को भरोसा नहीं है कि आगे और कटौती होगी। इशके अलावा बॉन्ड डीलरों को घटते कर व गैर-कर राजस्व संग्रह को देखते हुए सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को लेकर संदेह था। साथ ही उस समय जब बैंकों व आरबीआई से लाभांश में गिरावट आ रही है।
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