बॉन्ड नीलामी में आरबीआई ने खारिज की बोली

अनूप रॉय | मुंबई Dec 29, 2017 10:08 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को इस कैलेंडर वर्ष की अंतिम नीलामी में 11,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड के लिए पेशकश स्वीकार नहीं की। चार बॉन्डों के जरिए कुल 15,000 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। केंद्रीय बैंंक ने साल 2022 (3,000 करोड़ रुपये की पेशकश)व 2031 (8,000 करोड़ रुपये की पेशकश) में परिपक्व होने वाले बॉन्डों के लिए बोली स्वीकार नहीं की। बाकी 2,000-2,000 करोड़ रुपये के दोनों बॉन्ड इसने बेच दिए, जो 2022 व 2046 में परिपक्व होंगे। यह आरबीआई की तरफ से संभावित संकेत था कि केंद्रीय बैंक या सरकार उच्च प्रतिफल स्वीकार नहीं करेंगे और प्रतिफल की चाल अल्पावधि में अग्रणी स्तर पर रही है। आईडीएफसी बैंक के ट्रेडिंग प्रमुख पीयूष वाधवा ने कहा, नीलामी के आंशिक रद्दीकरण का मतलब यह है कि सरकार के पास नकदी की स्थिति सहज है और वह ज्यादा ब्याज नहीं देना चाहती। नीलामी के नतीजे के बाद बॉन्ड प्रतिफल 15 आधार अंक टूटकर कारोबार के दौरान 7.25 फीसदी रह गया, लेकिन अंत में 7.33 फीसदी पर बंद हुआ जबकि पिछला बंद स्तर 7.40 फीसदी रहा था।
 
यह बैंकों के लिए राहत की बात है क्योंकि उन्हें अब अपने बॉन्ड पोर्टफोलियो पर मामूली नुकसान का प्रावधान करना होगा। तथापि 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल तिमाही की शुरुआत में 6.648 फीसदी था, लिहाजा प्रतिफल की चाल तिमाही में अभी भी 68 आधार अंक ज्यादा है। इसलिए बैंक ट्रेजरी को अपने खाते में परेशानी झेलनी होगी। बॉन्ड डीलरों के मुताबिक, राष्ट्रीयकृत बैंक बाजार में खरीदार थे, वहीं विदेशी बैंक बिकवाल रहे क्योंकि सरकार के अतिरिक्त उधारी कार्यक्रम के बाद गुरुवार को प्रतिफल ने स्टॉप लॉस को छू लिया था।
 
राष्ट्रीयकृत बैंक खास तौर से कुछ लिक्विड स्टॉक खरीद रहे थे ताकि इसके प्रतिफल में गिरावट के अलावा उन शेयरों के मार्क टु मार्केट नुकसान को न्यूनतम किया जा सके, जो उनके बिक्री पोर्टफोलियो में हैं। हालांकि प्रतिफल का ऐसा प्रबंधन बेंचमार्क के क्षेत्र में संभव नहीं है क्योंंकि इन शेयरों में तरलता यानी नकदी काफी ज्यादा है।
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