बढ़ते निवेश से म्युचुअल फंड चिंतित

चंदन किशोर कांत | मुंबई Dec 29, 2017 10:09 PM IST

 

 
निवेशकों की तरफ से उच्च रिटर्न की उम्मीद के साथ लगातार हो रहे बड़े निवेश से म्युचुअल फंड उद्योग के अधिकारी हतोत्साहित हो रहे हैं, जो करीब 23 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर रहे हैं और यह रकम पांच साल पहले के मुकाबले तीन गुने से ज्यादा है। एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, जब निवेश इतना बड़ा हो जाता है तो प्रबंधन एक मसला बन जाता है। उन्होंने कहा, अगर हम और निवेशकों को खुश देखना चाहते हैं तो इससे जुड़ा जोखिम समान रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। मध्यम आकार वाले फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, संभावित संकट को टालने के लिए सुरक्षा चक्र लगाना बेहतर होता है। चिंता इस बात की है कि आखिर कौन सी चीजें ऐसे निवेश को बढ़ावा दे रही है और इस मामले में उम्मीद कितनी है।
 
फंड हाउस उन कदमों पर विचार शुरू कर दिया है जिसका क्रियान्वयन फंड पर लगाम कसे जाने के लिए जरूरी है। इन कदमों में एग्जिट लोड में इजाफा, फंडों की चुनिंदा श्रेणियों में वितरकों के प्रोत्साहन को घटाना या हटाना, नए निवेश को रोकना और निवेशकों को दिए जाने वाले सुझाव शामिल हैं। निवेशकोंं को यह सुझाव दिया जाएगा कि वह तीन साल से कम अवधि के निवेश के लिए बाजार में प्रवेश न करें।  करीब एक दर्जन म्युचुअल फंड योजनाओं ने पिछले साल के दौरान यूनिटों की बिक्री निलंबित कर दी थी। डीएसपी ब्लैकरॉक माइक्रो कैप, आईडीएफसी आर्बिट्रेज प्लस, प्रिंसिपल पर्सनल टैक्स सेवर फंड और एसबीआई स्मॉल ऐंड मिडकैप फंड जैसी योजनाओं ने अभी भी तक बिक्री दोबारा शुरू नहीं की है। उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि कई और फंड यूनिटों की बिक्री रोक सकते हैं।
 
मॉर्निंगस्टार इंडिया के निदेशक (फंड रिसर्च) कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, अच्छी बात यह है कि उद्योग सुरक्षा के बारे में सोच रहा है। निवेशकों ने कई साल से मंदी वाले बाजार वास्तव में नहीं देखे हैं। ऐसे कदमों से निवेशकों को तात्कालिक प्रतिक्रिया से बचाने में मदद मिल सकती है। संपत्ति प्रबंधकों को जो डर सता रहा है उनमें कंपनियों का लाभ और चुनाव के वर्ष में सरकार की नीतियां शामिल है। इसके अतिरिक्त वैश्विक घटनाक्रम पर भी उनकी नजर है। एक मुख्य निवेश अधिकारी ने कहा, साल 2016 के आखिर में सबकुछ अच्छा था। लेकिन इस साल की तेजी ने संदेह पैदा किया है। निवेशक भारी भरकम गिरावट मसलन 30-40 फीसदी का सामना कैसे करेंगे? क्या हम उस स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होंगे? हमें ऐसे मसलों पर अभी विचार शुरू करना चाहिए। उनके मुताबिक, डेट योजनाएं भी ऐसी ही हो सकती हैं और प्रतिफल की तलाश में खराब गुणवत्ता वाली प्रतिभूतियों में निवेश चला जाता है। कुछ फंड हाउस ने अपने ग्राहकों व वितरकों को संदेश भेजा है कि अगर उनका रिटर्न उम्मीद से ज्यादा हो तो वे अपनी रकम निकाल लें। एक बड़े फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, अगर निवेशक निकासी करते हैं तो क्या समस्या है? 
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