चुनाव के बाद अब टाटा, अदाणी के संयंत्र सुर्खियों में

अमृता पिल्लई | मुंबई Jan 01, 2018 09:49 PM IST

मुंद्रा में अदाणी और टाटा पावर की परियोजनाओं के लिए गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार के गठन को सकारात्मक माना जा रहा है। इन दोनों संयंत्रों के बेलआउट पर बातचीत जारी रहने के आसार दिख रहे हैं जबकि भाजपा को मिले कम बहुमत को लेकर विश्लेषकों ने चिंता जताई है। अप्रैल में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि इंडोनेशिया में कोयला निर्यात नीति में बदलाव के मद्देनजर इन कंपनियों को क्षतिपूर्ति शुल्क की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस आदेश के बाद विभिन्न हितधारकों के साथ एक विशेष समिति का गठन किया गया जिसमें गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्टï्र सरकार के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया। अदाणी पावर अपने मुंद्रा बिजली संयंत्र से गुजरात और हरियाणा को बिजली की बिक्री करती है। जबकि टाटा पावर अपने मुंद्रा संयंत्र से गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और महाराष्टï्र को बिजली बेचती है।
 
सीधे तौर पर इस मामले से अवगत एक व्यक्ति ने कहा, 'एक समिति गठित की गई है जो इन संयंत्रों को वित्तीय तौर पर व्यावहारिक बनाने के संभावित विकल्पों पर गौर करेगी। इस समिति की बैठक जनवरी में होने की उम्मीद है। गुजरात चुनाव खत्म होने के बाद अब इन बातचीत में कहीं अधिक तेजी आएगी।' उन्होंने कहा कि सत्ता में एक ही पार्टी के रहने से समाधान आसान हो सकता है। हालांकि भाजपा को गुजरात में मामूली अंतर से जीत मिली है जो कई लोगों को चिंताजनक लग रहा है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'मामूली बहुमत से जीतने का मतलब साफ है कि गुजरात सरकर कारोबारियों की ओर झुकाव प्रदर्शित नहीं करना चाहेगी।' उन्होंने कहा कि उम्मीद की जा रही है कि मार्च से पहले इस मामले में कोई ठोस नतीजा निकल सकता है।
 
एक घरेलू ब्रोकरेज ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'उम्मीद की जा रही थी कि गुजरात चुनाव के बाद मुंद्रा संयंत्र की बिक्री प्रक्रिया में तेजी आएगी। हालांकि सुदूर पूर्व रूस में टाटा पावर द्वारा हाल में एक कोयला खनन लाइसेंस के अधिग्रहण से लगता है कि कंपनी वहां से अपने मुंद्रा संयंत्र के लिए सोर्सिंग करेगी। ऐसे में उसकी बिक्री योजना पर सवाल उठने लगे हैं।'
कीवर्ड tata, adani, BJP, gujrat,

  
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