दर चक्र से क्रेडिट अपॉच्र्युनिटी फंडों में उछाल

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Jan 01, 2018 09:49 PM IST

ब्याज दरें निकट भविष्य में बढऩे या स्थिर बने रहने की उम्मीद के साथ डेट फंड फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। इनमें क्रेडिट अपॉच्र्युनिटी और कॉरपोरेट बॉन्ड अपॉच्र्युनिटी फंड शामिल हैं। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार पिछले 11 महीनों में इन फंडों की परिसंपत्तियां 7453 अरब रुपये से लगभग 50 प्रतिशत बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं। पिछले एक साल में इन फंडों ने 7.4 फीसदी का प्रतिफल दिया। एचडीएफसी कॉरपोरेट डेट अपॉच्र्युनिटीज फंड 1300 अरब रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों के साथ इस श्रेणी में सबसे बड़ा फंड है।
 
दर कटौती के चक्र में ठहराव ने इन फंडों के लिए अवसर सीमित कर दिए हैं। इन फंडों ने मुख्य रूप से घटती ब्याज दर वाले परिदृश्य में बढ़त दर्ज की है। बॉन्ड कीमतें और ब्याज दरें विपरीत बढ़ती हैं।  फंड्ïसइंडिया डॉटकॉम में म्युचुअल फंड रिसर्च प्रमुख विद्या बाला ने कहा, 'ऐसा लगता है कि कमजोर प्रदर्शन वाली ड्ïयूरेशन फंडों से रकम का कुछ प्रवाह क्रेडिट अपॉच्र्युनिटी फंडों में गया है। यह बदलाव प्रतिफल कमाने पर जोर देने वाले निवेशकों द्वारा किया गया।' पिछले एक साल के दौरान आरबीआई ने तेल कीमतों में तेजी और राजकोषीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सख्त रुख अपनाया। 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियों का प्रतिफल 2017 में 81 आधार अंक बढ़कर 7.326 फीसदी हो गया। विश्लेषकों का कहना है कि ब्याज दरें भविष्य में मजबूत बने रहने या इनमें तेजी आने की संभावना है जिससे लंबी अवधि के निवेश उत्पाद आकर्षक नहीं रह गए हैं। 
 
ऐक्सिस म्युचुअल फंड के प्रमुख (निर्धारित आय) आर शिवकुमार ने कहा, 'जहां जी-सेक यानी सरकारी प्रतिभूतियां मजबूत बनी रह सकती हैं, वहीं कॉरपोरेट मुनाफे में सुधार की संभावना और भविष्य में रेटिंग अपग्रेड में तेजी से क्रेडिट अपॉच्र्युनिटीज फंड इस समय अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बन गए हैं।' क्रेडिट अपॉच्र्युनिटी या कॉरपोरेट बॉन्ड अपॉच्र्युनिटी फंड जैसे म्युचुअल फंड ब्याज दर में उतार-चढ़ाव पर जोर नहीं देते हैं, लेकिन कॉरपोरेट बॉन्डों में से बढ़त बनाने की कोशिश करते हैं। इन्हें रेटिंग अपग्रेड का भी लाभ मिल सकता है जिससे कीमत वृद्घि से मिलने वाले लाभ में इजाफा हो सकता है। जहां इन फंडों में ड्ïयूरेशन फंडों की तुलना में कम उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है, वहीं इनमें पूंजीगत नुकसान का अधिक जोखिम भी बना रहता है।
 
निवेशकों को इन फंडों में निवेश से पहले पोर्टफोलियो की रेटिंग, विविधता और तरलता जैसे प्रमुख जोखिम कारकों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। शिवकुमार कहते हैं, 'कम रेटिंग वाले पत्रों में जोखिम अधिक रहता है और निवेशकों को नॉन-एएए की तुलना में एएए-रेटेड पत्रों की प्रतिशतता का आकलन करने की जरूरत होती है।'
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