सेबी के प्रस्ताव से म्युचुअल फंड उद्योग होगा प्रभावित!

जयदीप घोष और ऐश्ली कुटिन्हो | नई दिल्ली/मुंबई Jan 03, 2018 09:50 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेश सलाहकारों और वितरकों की जिम्मेदारी अलग किए जाने पर जोर दिया है। इससे 22 लाख करोड़ रुपये के म्युचुअल फंड उद्योग में बेचैनी पैदा हो गई है। सेबी के नए प्रस्ताव से फंडों के वितरण से जुड़े बैंक, एनबीएफसी और अन्य कंपनियां उपभोक्ताओं को सलाह देने में सक्षम नहीं रह जाएंगी। म्युचुअल फंड उद्योग में सिस्टमैटिक इवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) से हर महीने 50 अरब रुपये की पूंजी आती है। सेबी के नए प्रस्ताव से म्युचुअल फंड उद्योग को अचानक ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जिसमें प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों में उसके प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक बैंकों को इससे पूरी तरह अलग कर दिया जाएगा। एक फंड हाउस के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'यदि इन प्रस्तावों पर अमल होता है तो लगभग 40 फीसदी पूंजी प्रवाह प्रभावित होगा क्योंकि बैंकों की संपत्ति प्रबंधन इकाइयां म्युचुअल फंडों पर सलाह देने में सक्षम नहीं रह जाएंगी।'

 
वैल्यू रिसर्च के मुख्य कार्याधिकारी धीरेंद्र कुमार ने कहा, 'नए प्रस्ताव वितरण के संदर्भ में भी बड़ा फेेरबदल लाएंगे।' वितरण वास्तव में एक ऐसा सामान्य बिजनेस मॉडल है जिसमें वितरक को फंड कंपनियों से खास कमीशन शुरू में या बाद में मिलता है स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों (आईएफए) का बिजनेस मॉडल भी प्रभावित होगा और कई सलाहकार इस व्यवसाय से बाहर हो सकते हैं। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख ने कहा कि बाजार नियामक की पहल वास्तव में बड़ी तादाद में इकाइयों (रिटेल निवेशकों) को नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने कहा, 'यदि ये दिशा-निर्देश मौजूदा स्वरूप में लागू होते हैं तो निवेश परामर्श का व्यवसाय लंबे समय तक आकर्षक नहीं रह जाएगा। इसलिए, सिर्फ धनी वर्ग ही निवेश परामर्श लेने में सक्षम होगा, जैसा कि ब्रिटेन में होता है। ब्रिटेन में ऐसे दिशा-निर्देश लागू हैं। छोटे निवेशक को कोई सलाह नहीं मिल पाएगी जो उसके लिए नुकसानदायक होगा।' उद्योग के अनुमान के अनुसार मौजूदा समय में लगभग 100,000 मयुचुअल फंड वितरक हैं और इनमें से लगभग 10,000 सक्रिय तौर पर काम कर रहे हैं। सेबी के नए प्रस्ताव में बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), कंपनियों, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप्स (एलएलपी) और उन कंपनियों को निवेश परामर्श देने से रोकने की योजना है जो वितरण सेवाएं मुहैया कराती हैं। इसका मतलब है कि म्युचुअल फंड प्रवाह के लिए प्रमुख स्रोत बैंकों की परिसंपत्ति प्रबंधन इकाइयां म्युचुअल फंडों के बारे में सलाह नहीं दे पाएंगी। 
 
मौजूदा समय में म्युचुअल फंड सेक्टर का पूंजी प्रवाह तीन स्रोतों से आता है- 40 प्रतिशत बैंकों से, 30-30 प्रतिशत स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों और राष्ट्रीय वितरकों से। इस उद्योग के जानकारों का कहना है कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड, एचडीएफसी म्युचुअल फंड जैसे प्रमुख कंपनियों के लिए अपनी बैंक शाखाओं से रकम संग्रहण अधिक होगा। नए प्रस्ताव पंजीकृत निवेश सलाहकारों को भी सगे संबंधियों के जरिये म्युचुअल फंडों के वितरण से रोकते हैं। बजाज कैपिटल के राष्ट्रीय प्रमुख (म्युचुअल फंड) अंजनेय गौतम कहते हैं, 'नए प्रस्ताव से व्यापक रूप से यह पता चलता है कि कोई संस्था या परिवार वितरण और सलाहकार सेवाओं दोनों की पेशकश नहीं कर सकते।' गौतम का कहना है कि ऐसे मामले भी सामने आ सकते हैं जिनमें एक भाई निवेश सलाहकार जबकि दूसरा भाई वितरक हो। एक फंड प्रबंधक का कहना है, 'कोई व्यक्ति सिर्फ इस वजह से कैसे अपना व्यवसाय बंद कर सकता है कि उसका भाई निवेश सलाहकार या वितरक है।' रिलायंस निप्पॉन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी संदीप सिक्का का मानना है कि आईएफए को दोनों कार्य (सलाह और वितरण) की अनुमति सिर्फ खास तरह के निवेशकों के संदर्भ में दिए जाने से स्थिति बेहतर होगी। 
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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