निफ्टी कंपनियों की आय वृद्घि दो अंक में

कृष्ण कांत | मुंबई Jan 10, 2018 10:08 PM IST

निजी क्षेत्र के बैंकों, तेल विपणन कंपनियों, वाहन निर्माताओं और धातु उत्पादक कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन की मदद से निफ्टी-50 कंपनियों द्वारा लगातार दूसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2017) में आय में दो अंक की वृद्घि दर्ज किए जाने की संभावना है। आधार प्रभाव का असर भी इस तिमाही में दिखा है क्योंकि राजस्व और मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के दौरान नोटबंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ था। वाहन, सीमेंट और कंज्यूमर गुड्ïस जैसे क्षेत्रों के लिए भी स्थिति इसी तरह की है। निफ्टी-50 कंपनियों का संयुक्त शुद्घ लाभ वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 15.4 फीसदी बढऩे का अनुमान है जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान इसमें 16.4 फीसदी और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान 12.2 फीसदी की वृद्घि दर्ज की गई। निफ्टी कंपनियों की संयुक्त रूप से शुद्घ बिक्री तिमाही के दौरान 15.3 फीसदी बढऩे की संभावना है जो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान राजस्व में सालाना आधार पर 9.4 फीसदी और चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही की 11.5 फीसदी की वृद्घि की तुलना में अधिक है। 
 
हालांकि मुनाफे और राजस्व को ज्यादातर मजबूती चार क्षेत्रों - ऊर्जा, निजी क्षेत्र के बैंक, धातु और खनन कंपनियों तथा वाहन निर्माताओं- की चुनिंदा कंपनियों से ही मिल रही है जिससे कॉरपोरेट आय पर दबाव दिख सकता है। यदि इन क्षेत्रों को अलग रखकर बात की जाए तो शुद्घ लाभ शेष सूचकांक कंपनियों के लिए सालाना आधार पर 0.4 फीसदी तक घटने का अनुमान है जबकि इनकी राजस्व वृद्घि तिमाही के दौरान 4.5 फीसदी पर धीमी बने रहने की आशंका है। राजस्व के संदर्भ में, राजस्व वृद्घि का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उन चार क्रूड तेल एवं विपणन कंपनियों पर केंद्रित रहने का अनुमान है जो सूचकांक में शामिल है। इनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल हैं। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटी के संजीव प्रसाद ने वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही के लिए आय अनुमानों पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है, 'वाहन (बिक्री वृद्घि निम्न स्तर पर और मार्जिन में सुधार), सीमेंट, उपभोक्ता उत्पादों (लो बेस, लागत बचत पहलों, परिचालन दक्षता और जीएसटी-केंद्रित बचत), ऊर्जा (कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से ओएमसी के लिए अच्छी बढ़त), औद्योगिक, धातु एवं खनन (ऊंची प्राप्तियों) और एनबीएफसी (वाहन और कंज्यूमर डï्ïयूरेबल्स में मांग में तेजी आई है) की शुद्घ आय में दो अंक की वृद्घि की संभावना है।'  
 
एमके ग्लोबल के धनंजय सिन्हा दिसंबर 2017 तिमाही की आय को राजकोषीय विस्तार, कम जीएसटी दरों से मांग वृद्घि, नोटबंदी के झटके के बाद सुधार और बड़ी तादाद में असंगठित क्षेत्र के संगठित क्षेत्र में तब्दील होने से जुड़े चक्रीय सुधार के तौर पर देख रहे हैं। सिन्हा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, 'परिदृश्य में सुधार का असर ऋण वृद्घि में भी दिख रहा है। ऋण वृद्घि सुधरकर 11 फीसदी (खासकर निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए) हो गई है और खपत मांग में वृद्घि से एफएमसीजी, वाहन और मीडिया (विज्ञापन खर्च) क्षेत्रों में बिक्री मजबूत हुई है।' यह विश्लेषण कोटक सिक्योरिटीज, एडलवाइस सिक्योरिटीज, मोतीलाल ओसवाल, एमके ग्लोबल, एचडीएफसी सिक्योरिटीज, शेयरखान और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज समेत विभिन्न इक्विटी ब्रोकरेज फर्मों द्वारा अक्टूबर-दिसंबर 2017 की तिमाही के लिए जताए गए आय अनुमानों पर आधारित है। 
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