रियल्टी ब्रोकरेज पर नहीं एफडीआई का असर!

बीएस संवाददाता | मुंबई Jan 10, 2018 10:10 PM IST

केंद्र सरकार ने रियल एस्टेट ब्रोकरेज में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि प्रॉपर्टी ब्रोकरेज का स्वामित्व हासिल करने वाली अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कंपनियां इतनी छोटी हैं कि उन्हें विदेशी निवेश नहीं मिल सकता। हालांकि सरकार ने अपने परिपत्र में आज कहा, 'यह बात स्पष्ट करने का फैसला किया गया है कि रियल एस्टेट ब्रोकिंग सेवाएं रियल एस्टेट कारोबार के बराबर नहीं हैं ऐसे में वे स्वचालित तरीके से 100 फीसदी एफडीआई पाने की पात्र हैं।' ब्रोकरेज प्रमुख और फंड प्रबंधकों का कहना है कि इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। नाइट फ्रैंक के कंट्री प्रमुख शिषिर बैजल कहते हैं, 'जब तक घरेलू ब्रोकर अंतरराष्ट्रीय साझेदार नहीं चाहते तब तक कोई ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।'  
 
एएसके प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अमित भगत का कहना है, 'रियल एस्टेट ब्रोकरेज एक सेवा उद्योग है और बड़े ब्रोकरेज पहले से ही मौजूद हैं। ऐसे में निवेश या रोजगार के मौके तैयार करने में आज के फैसले का कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।' जोन्स लैंग लसॉल, सीबीआरई, कुशमैन ऐंड वेकफील्ड, कोलायर्स, अमेरिका और ब्रिटेन के नाइट फ्रैंक सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रॉपर्टी सलाहकार यहां मौजूद हैं। जेएलएल इंडिया के पूर्व चेयरमैन ने भी अपनी कंसल्टेंसी अनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स बनाई है।
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