प्राइसवाटर को महंगा पड़ सकता है प्रतिबंध

कृष्ण कांत | मुंबई Jan 11, 2018 09:41 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्राइस वाटरहाउस (पीडब्ल्यू) पर दो साल का प्रतिबंध लगाए जाने से देश में दूसरी ऑडिटिंग कंपनियों की चांदी हो सकती है और करीब 1.5 अरब रुपये का कारोबार उनकी झोली में आ सकता है।  पीडब्ल्यू ने वर्ष 2016-17 में 85 सूचीबद्घ कंपनियों का ऑडिट किया था और इन कंपनियों ने उस साल ऑडिट पर एक अरब रुपये खर्च किए थे। इस वित्त वर्ष के दौरान पीडब्ल्यू के पास करीब 75 सूचीबद्घ कंपनियां हैं लेकिन सेबी ने उसके सूचीबद्घ कंपनियों का ऑडिट करने पर रोक लगा दी है।  
 
विशेषज्ञों का कहना है कि  इससे दूसरी बड़ी अकाउंटिंग कंपनियों के लिए कारोबार का सुनहरा अवसर मिल सकता है। वे बड़ी कंपनियों को कर सलाह, प्रबंधन और कारोबारी सलाहकार सेवाएं मुहैया कराकर ऑडिट बिजनेस से ज्यादा राजस्व कमा सकते हैं।  यह विश्लेषण सभी सूचीबद्घ कंपनियों के ऑडिट खर्च पर आधारित है और इसमें पीडब्ल्यू नेटवर्क में शामिल अकाउंटिंग कंपनियां प्राइस वाटरहाउस, लवलॉक ऐंड लुइस तथा दलाल ऐंड शाह शामिल हैं। कानून के मुताबिक पीडब्ल्यू पर प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बाद कंपनियां वापस उससे जुड़ सकती हैं लेकिन सूचीबद्घ कंपनियों को हर 10 साल में अपना ऑडिटर रोटेट करना पड़ता है। एक कंपनी के वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'पीडब्ल्यू की छवि को बट्टïा लगा है और संभव है कि कुछ कंपनियां फिर उससे न जुड़ें। ऑडिटिंग ग्राहकों के दूर होने से भारत में पीडब्ल्यू के दूसरे कारोबार पर भी असर होगा।'
 
पीडब्ल्यू ने ऑडिटर रोटेशन नियम के बाद इस वर्ष टाटा स्टील, हिंडाल्को और अशोक लीलैंड जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने साथ जोड़ा था। पिछले साल उसने इंडसइंड बैंक, बजाज समूह की कंपनियों बजाज ऑटो और बजाज फाइनैंस, ग्लैक्सो, मदरसन सूमी और मारिको जैसी सूचीबद्घ कंपनियों के खातों को ऑडिट किया था।  सेबी के आदेश के बाद इन कंपनियों को अब नया ऑडिटर ढूंढना पड़ेगा जिससे पीडब्ल्यू की प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए अवसर के नए द्वार खुलेंगे। अलबत्ता विशेषज्ञों का कहना है कि पीडब्ल्यू ने सेबी के आदेश को प्रतिभूति अपीलीय पंचाट (एसएटी) में चुनौती दी है और संभव है कि कंपनियां अंतिम निर्णय लेने से पहले पंचाट के फैसले का इंतजार करें।
 
पीडब्ल्यू ने वित्त वर्ष 2017 में जिन कंपनियों का ऑडिट किया था उनका संयुक्त बाजार पूंजीकरण सभी सूचीबद्घ कंपनियों का करीब 10 फीसदी के बराबर था। इन कंपनियों का शुद्घ मुनाफा सभी सूचीबद्घ कंपनियों का 8 फीसदी और शुद्घ बिक्री 5.4 फीसदी थी। लेकिन इस मामले ने ऑडिटर कंपनियों की चिंता भी बढ़ा दी है क्योंकि अब कंपनियों के खातों की गहराई से जांच करनी होगी। इससे उनका काम बढ़ जाएगा।
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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