सेबी को सहमत नहीं कर पाया प्राइस वाटरहाउस

श्रीमी चौधरी | मुंबई Jan 11, 2018 09:50 PM IST

ऑडिट फर्म प्राइस वाटरहाउस (पीडब्ल्यू) ने बाजार नियामक सेबी के साथ सत्यम कंप्यूटर मामले को तथाकथित 'कंसेंट' व्यवस्था के जरिये निपटाने की दो बार कोशिश की थी, लेकिन उसे दोनों बार विफलता का सामना करना पड़ा।  बाजार नियामक ने शुक्रवार को पीडब्ल्यू पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया और उससे 13 करोड़ रुपये चुकाने को भी कहा। अनुमति की सख्त प्रक्रिया ने पीडब्ल्यू को सहमति समझौते के लिए पहली कोशिश में नाकाम किया, जबकि ऑडिट कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सेबी के क्षेत्राधिकार से जुड़े उसके विवाद ने दूसरी बार उसे विफलता का स्वाद चखाया। 
 
सहमति व्यवस्था कथित तौर पर उल्लंघन करने वाली कंपनियों को अपने लंबित मामले दोष स्वीकार किए या खंडन किए बगैर सेबी के साथ निपटाने की अनुमति देती है।  पीडब्ल्यू ने सेबी द्वारा धोखाधड़ी और अनुचित कारोबार प्रणालियों (एफयूटीपी) मानकों के कथित उल्लंघन के लिए 14 फरवरी 2009 को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के तुरंत बाद पहली बार कंसेंट आवेदन किया था।  इस आवेदन को ठुकरा दिया गया था क्योंकि कथित उल्लंघन मौजूदा सहमति ढांचे के अधीन अनुमति दिए जाने योग्य नहीं था। 
 
सेबी के एक पूर्व अधिकारी ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, 'सत्यम मामले के दौरान सहमति समझौते की रूपरेखा में कई शर्तें शामिल थीं। खासकर, ऐसे अपराधों को कंसेंट के दायरे से बाहर रखा गया था जो स्वाभाविक तौर पर गंभीर हैं, या जिनका बाजार केंद्रित प्रभाव है या जिनसे बड़ा नुकसान हुआ हो या निवेशकों के अधिकार प्रभावित होते हों।' पीडब्ल्यू ने अपनी दूसरा कंसेंट याचिका पिछले साल सितंबर में नए कंसेंट ढांचे के तहत दाखिल कराई। यह नया कंसेंट ढांचा फरवरी 2017 से प्रभावी हुआ था। कंसेंट के तहत नया नियम अपेक्षाकृत आसान है क्योंकि इसमें पूंजी बाजारों में गंभीर उल्लंघन के लिए जांच से जुड़ी कंपनियों को मामलों के निपटान में कुछ राहत दी गई है।  दूसरा आवेदन सत्यम कंप्यूटर मामले में अमेरिका के सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) द्वारा 1.75 करोड़ रुपये के जुर्माने से जुड़ा हुआ था। 
कीवर्ड PW, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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