एक शेयर वाले एसआईपी की बढ़ी मांग

पवन बुरुगुला | मुंबई Jan 12, 2018 10:11 PM IST

सिंगल-स्टॉक यानी एक शेयर वाले सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) छोटे निवेशकों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। खासकर म्युचुअल फंड (एमएफ) में प्रत्यक्ष रूप से निवेश को पसंद करने वाले निवेशकों को ये एसआईपी ज्यादा भा रहे हैं। ब्रोकिंग अधिकारियों का कहना है कि उनके सक्रिय ग्राहक आधार का बड़ा हिस्सा सिंगल-स्टॉक एसआईपी खरीद चुका है और इसे लेकर दिलचस्पी और बढऩे की संभावना है क्योंकि बाजार लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी के बाजार का रुझान है और छोटे निवेशकों में जोखिम सहन करने की क्षमता ऐसे समय में बढ़ जाती है।
 
सिंगल-स्टॉक एसआईपी दरअसल एक कंपनी या चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में आवर्ती निवेश है। उदाहरण के लिए कि  कोई निवेशक मारुति सुजूकी के दीर्घावधि संभावनाओं को लेकर उत्साहित है, लेकिन वह इसमें एक-मुश्त बड़ा निवेश करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में ब्रोकर उसे उस शेयर में हर महीने एक तय रकम (मान लीजिए 10,000 रुपये) निवेश करने का विकल्प प्रदान करते हैं। इससे लंबी अवधि में शेयर एकत्रित करने और शेयर के भाव में उतार-चढ़ाव की चिंता से दूर बने रहने में मदद मिलती है।
 
इसी तरह ब्रोकर कई शेयरों के वर्ग में निवेश करने की भी सलाह दे रहे हैं जिनमें निवेशक हर महीने एक निर्धारित रकम लगा सकता है। म्युचुअल फंडों के विपरीत, ऐसी योजनाओं में बाजार नियामक सेबी के मानकों का पालन करने की भी जरूरत नहीं होती है। इसलिए, शेयरों का भारांश निवेशक या ब्रोकर की जरूरत के हिसाब से बदल सकता है। इनमें से ज्यादातर निवेश योजनाएं तीन से पांच शेयरों वाली हैं। इसलिए एक शेयर का प्रति कंपनी में सेबी के 10 प्रतिशत के अधिकतम भारांश मानक (म्युचुअल फंड योजना में निवेश के संदर्भ में) के विपरीत 20-30 फीसदी भारांश होता है। ऐसे ज्यादातर एसआईपी में ब्रोकर ग्राहकों को परामर्श सेवाएं भी मुहैया कराते हैं, जिनके आधार पर निवेशक अपनी मर्जी के हिसाब से संबद्घ निवेश योजना में बदलाव करा सकता है। 
 
केआर चोकसी शेयर्स ऐंड सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी कहते हैं, 'ये उत्पाद उन छोटे और मझोले निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं जो किसी कंपनी या समूह कंपनियों के शेयरों को बड़ी तादाद में खरीदना तो चाहते हैं पर वे एक बार में इन्हें खरीदने में सक्षम नहीं होते हैं। ये योजनाएं आसान और सुविधाजनक हैं और इनमें कम से कम दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत होती है। ये उत्पाद लोकप्रिय बने रहेंगे क्योंकि निवेशकों में वित्तीय अनुशासन बढ़ रहा है।' म्युचुअल फंड एसआईपी का बहीखाता बढ़कर 60 अरब रुपये प्रति महीने हो गया है। कई ब्रोकर इसे अवसर के तौर पर देख रहे हैं और निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से इक्विटी में आवर्ती निवेश की सलाह दे रहे हैं। 
 
सिंगल-स्टॉक एसआईपी में निवेशकों द्वारा लागत भी म्युचुअल फंड के मुकाबले काफी कम है, क्योंकि इन योजनाओं में कोई अतिरिक्त खर्च जुड़ा हुआ नहीं है। एमएफ में खर्च अनुपात 1.75 फीसदी से 2.5 फीसदी है, जबकि सिंगल-स्टॉक एसआईपी के लिए यह 0.25-0.5 फीसदी है।  बाजार कारोबारियों का कहना है कि ब्रोकर नए निवेश उत्पादों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। कई छोटे ब्रोकर निवेश परामर्श, फंड और बीमा वितरण जैसी गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। 
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