उधारी सीमित होने से बॉन्ड प्रतिफल में आई भारी गिरावट

अभिजीत लेले | मुंबई Jan 17, 2018 09:46 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा बाजार से अतिरिक्त उधारी का आकार घटाए जाने से 10-वर्षीय सरकारी बॉन्डों के प्रतिफल में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बॉन्ड बाजार के डीलरों का कहना है कि 2017-18 में अतिरिक्त उधारी में 300 अरब रुपये तक की कटौती राहत के तौर पर सामने आई है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि राजस्व संग्रहण को लेकर विश्वास बढ़ा है।  डीलरों का कहना है कि बॉन्ड के प्रतिफल में और गिरावट की गुंजाइश सीमित है क्योंकि बाजार बढ़ती मुद्रास्फीति और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के प्रभाव को लेकर चिंतित है। 
 
2018 में परिपक्व हो रहे भारत सरकार के 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल मंगलवार के 7.38 फीसदी से घटकर बुधवार को 7.22 फीसदी रह गया।  आईसीआईसीआई बैंक ने एक शोध रिपोर्ट में कहा कि राजकोषीय घाटे के आंकड़ों आगामी वर्ष में सरकारी उधारी के लिए परिदृश्य के लिए सभी का ध्यान अब केंद्रीय बजट पर केंद्रित हो गया है। विदेशी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा कि बाजार से अनिश्चितता में कमी आई है। बॉन्ड प्रतिफल अब 500 अरब रुपये की अतिरिक्त उधारी के लिए 27 दिसंबर की घोषणा से पहले के स्तर पर आ गया है। 27 दिसंबर 2017 से पहले भी बाजार में अतिरिक्त उधारी को लेकर उतार-चढ़ाव देखने को मिला था।  विभिन्न राजस्व प्राप्तियों और खर्च की समीक्षा के बाद बुधवार को केंद्र सरकार ने 2017-18 के अपने अतिरिक्त बाजार उधारी कार्यक्रम में 300 अरब रुपये तक की कमी कर दी। इस कदम से राजकोषीय घाटे को नियंत्रित बनाए रखने में मदद मिल सकती है। सरकार ने पिछले साल 27 दिसंबर को घोषणा की थी कि वह प्रतिभूतियों के जरिये 2017-18 के दौरान 500 अरब रुपये की अतिरिक्त उधारी जुटाएगी। हालांकि इससे बजट में निर्धारित शुद्घ उधारी में कोई बदलाव नहीं आएगा। 
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