रफ्तार में नहीं दिख रही महिंद्रा ऐंड महिंद्रा

पवन लाल | मुंबई Jan 19, 2018 09:47 PM IST

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) ने जब 2008 में काइनेटिक मोटर से 1.4 अरब रुपये में दोपहिया कारोबार के अधिग्रहण की घोषणा की थी तो लोगों का मानना था कि अपने ट्रैक्टर और स्पोट्ïर्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) के लिए चर्चित यह कंपनी तेजी से उभर रहे मोटरसाइकल बाजार में अपने वितरण नेटवर्क और दमदार ब्रांड का फायदा उठाएगी। लेकिन एक दशक बाद भी कंपनी बाजार में अपने उत्पादों को उतारने के लिए संघर्ष कर रही है और बजाज ऑटो, हीरो मोटोकॉर्प एवं होंडा जैसे मौजूदा खिलाडिय़ों को टक्कर नहीं दे पाई है। यही कारण है कि महिंद्रा टू व्हीलर्स की बाजार हिस्सेदारी महज 0.10 फीसदी है। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि कंपनी भविष्य के लिए निवेश की घोषणा करते हुए दोपहिया वाहनों की प्रीमियम श्रेणी में टक्कर देगी।
 
 उधर, मॉम ऐंड मी शृंखला के तहत स्टोरों का संचालन करने वाली इकाई महिंद्रा रिटेल ने काफी तेजी से विस्तार किया है। अपनी ऐसेट लाइट रणनीति के तहत 2015 में उसने कंपनी के स्वामित्व वाले 25 स्टोरों को बंद करते हुए फ्रैंचाइजी मॉडल को आगे बढ़ावा दिया। उसने डॉटकॉम में निवेश की रणनीति के तहत अपना नाम बदलकर बेबीओये कर लिया जिसे अंतत: फस्र्टक्राई डॉट कॉम को बेची गई। इतना ही नहीं, इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी रेवा ने करीब पांच साल पहले एमऐंडएम संग करार किया था लेकिन उसके परिचालन की रफ्तार भी सुस्त रही। रेवा की सालाना बिक्री महज 1,000 से 1,200 वाहनों के दायरे में है। हालांकि महिंद्रा ऐंड महिंद्रा समूह ने उभरते कारोबार में पांव जमाने की रणनीति बनाई थी लेकिन उसके अधिकतर दांव विफल रहा। जबकि वह एसयूवी जैसे अपने प्रमुख कारोबार पर भी कम ध्यान देने लगी।
 
आज महिंद्रा ऐंड महिंद्रा घटती बाजार हिस्सेदारी, बिक्री में गिरावट और कॉम्पैक्ट एसयूवी श्रेणी में उत्पादों के अभाव जैसी समस्याओं से जूझ रही है। जबकि कॉम्पैक्ट एसयूवी श्रेणी में  फोर्ड, रेनो और मारुति ने इकोस्पोर्ट, डस्टर, एसक्रॉस और कम्पास जैसे तमाम मॉडल उतारे हैं। यहां तक कि पिछले साल नवंबर में टाटा मोटर्स ने भी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी वाहन कंपनी बन गई जबकि उसके यात्री कार कारोबार की रफ्तार काफी सुस्त रही है। हालांकि दिसंबर में वह शीर्ष पांच कार विनिर्माताओं के बीच दोबारा तीसरे पायदान पर पहुंच गई। लेकिन उसके यूटिलिटी वाहनों की बिक्री में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
 
महिंद्रा ऐंड महिंद्रा समूह ने 1994 में अपने कारोबार को छह श्रेणियों- वाहन, वाहनों के कलपुर्जे, कृषि उपकरण, वित्तीय सेवा, बुनियादी ढांचा और सॉफ्टवेयर- में बांटा था। समूह ने आतिथ्य सेवा, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे कारोबार में भी निवेश किया था और तेल ड्रिलिंग जैसे अन्य कारोबार से बाहर होने का निर्णय लिया था। लेकिन वास्तविकता यह है कि कंपनी को मुख्य तौर पर ट्रैक्टर, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोटिव कारोबार से रफ्तार मिली। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा समूह की कुल बिक्री में वाहन, ट्रैक्टर और टेक महिंद्रा का योगदान करीब 86 फीसदी रहा। जबकि शेष बिक्री में एमऐंडएम फाइनैंस और महिंद्रा सीआईई का प्रमुख योगदान रहा। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने वरिष्ठï अधिकारियों से बातचीत के आग्रह पर कोई टिप्पणी नहीं की। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर एवं लीडर शशांक त्रिपाठी ने कहा, 'मोटे तौर पर तीन अलग-अलग कारोबार से समूह खुद को मजबूत कर सकता है।' उन्होंने कहा कि यह समझना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि समूह शीर्ष तीन में शामिल नहीं है। ऐसे में उसे अपने प्रमुख कारोबारी इकाइयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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