निफ्टी, सेंसेक्स में तेजी का कीर्तिमान

पवन बुरुगुला | मुंबई Jan 23, 2018 09:34 PM IST

दलाल पथ तेजी के रथ पर सवार है। भारतीय शेयर बाजार में आज दो नए कीर्तिमान बने - बेंचमार्क सेंसेक्स पहली बार 36,000 को पार कर गया। इसमें 1,000 अंकों की तेजी महज 4 कारोबारी सत्र में दर्ज की गई। इसी तरह नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 11,000 के पार पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2018-19 में भारत की अर्थव्यवस्था के सबसे तेज गति से बढऩे का अनुमान लगाया है। इससे निवेशकों की धारणा को बल मिला, जिससे दोनों सूचकांक करीब एक-एक फीसदी चढ़ गए। बीएसई मिडकैप में भी 1.1 फीसदी की तेजी देखी गई।
 
विदेशी निवेशक पिछले पांच दिनों से हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लिवाली कर रहे हैं। आज भी विदेशी निवेशकों ने 1,230 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू निवेशकों ने 170 करोड़ रुपयेे की लिवाली की। आईएमएफ के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 में भारत की वृद्घि दर 7.4 फीसदी और 2020 में 7.8 फीसदी रह सकती है। बाजार के भागीदारों का कहना है कि भारतीय शेयरों में तेजी का दौर अभी रह सकता है क्योंकि वैश्विक स्तर पर तरलता की समस्या नहीं है। घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और कंपनियों की आय में वृद्घि से भी बाजार को दिशा मिल सकती है।
 
सीएलएसए के इंडिया स्ट्रैटजिस्ट महेश नंदूरकर ने कहा, 'कंपनियों की आय सामान्य होने से अगले दो साल में 15 से 20 फीसदी आय की उम्मीद है। आय में सुधार से विदेशी निवेशकों की भी रुचि भारतीय बाजार में बढ़ सकती है और 2018 में वे निवेश बढ़ा सकते हैं।' बैंकिंग शेयरों में लगातार तेजी बनी हुई है। निवेशकों को लग रहा है कि अर्थव्यवस्था में तेजी का सबसे अधिक फायदा बैंकिंग क्षेत्र को ही होगा। मंगलवार को बैंकिंग शेयरों के  सूचकांक में 1.6 प्रतिशत तेजी आई। भारतीय स्टेट बैंक का शेयर 3.9 प्रतिशत तक चढ़ गया। आईसीआईसीआई बैंक और ऐक्सिस बैंक के शेयरों में 3-3 प्रतिशत की तेजी आई। 
 
विश्लेषकों के अनुसार अगले कुछ महीनों के दौरान तेल की बढ़ती कीमतें बाजार का मिजाज खराब कर सकती हैं। महंगा कच्चे तेल महंगाई बढ़ा सकती है, जिससे सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। पिछले एक साल में कच्चे तेल में 25 प्रतिशत की  तेजी आई है और इस समय यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर है। हालांकि 2014 के 140 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले अब भी यह कम है। कच्चा तेल 10 डॉलर प्रति बैरल और महंगा हो गया तो अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल हो सकती है। 
 
केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने कहा, 'वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढऩे से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। जब भी तेल महंगा होता है महंगाई बढ़ जाती है और राजकोषीय घाटा बढ़ जाता है। मौजूदा स्तर पर तेल अपेक्षाकृत महंगा दिख रहा है और इसका असर कम करने के लिए सरकार को तेल पर उत्पाद शुल्क कम करना पड़ सकता है। इससे महंगाई नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।'
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