प्राइस वाटरहाउस को हटा सकता है एनएसई

श्रीमी चौधरी | मुंबई Jan 25, 2018 10:05 PM IST

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज निदेशक मंडल की आगामी बैठक में अपने अंकेक्षक प्राइस वाटरहाउस को हटाने की मांग उठ सकती है। बाजार नियामक सेबी की तरफ से ऑडिट फर्म पर दो साल की पाबंदी लगाने के बाद यह देखने को मिल सकता है। सेबी ने सत्यम खातों में धोखाधड़ी मामले में कथित संलिप्तता पर यह कदम उठाया है। एक्सचेंज ने प्राइस वाटरहाउस को सितंबर 2016 से पांच साल के लिए सांविधिक अंकेक्षक नियुक्त किया था। बाजार नियामक की पाबंदी सभी सूचीबद्ध कंपनियों और इसके तहत पंजीकृत इंटरमीडियरीज पर लागू होगी।
 
एक्सचेंज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एक्सचेंज अपनी बोर्ड बैठक में अंकेक्षक को बदलने के लिए प्रस्ताव रखेगा, जो 2 फरवरी को होने वाली है। कंपनी अधिनियम के मुताबिक, धारा 139, 140 के तहत नियुक्त अंकेक्षक को समयावधि समाप्त होने से पहले सिर्फ और सिर्फ कंपनी के विशेष प्रस्ताव के जरिए ही हटाया जा सकता है। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी की दरकार होती है। इससे पहले इकाई को केंद्र सरकार या कंपनी मामलों के मंत्रालय से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि उपधारा के तहत कार्रवाई से पहले संबंधित अंकेक्षक को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिया जाना चाहिए। कंपनी इसके साथ ही नए अंकेक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। सूत्रों ने कहा, सेबी की पाबंदी के बाद प्राइस वाटरहाउस की एनएसई के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हुई है। प्राइस वाटरहाउस चाहती है कि सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल की तरफ से मामला सुना जाने तक वह अंकेक्षक बनी रहे।
 
एक्सचेंज हालांकि नई ऑडिट फर्म की नियुक्ति चाहता है, भले ही सेबी के आदेश पर प्राइस वाटरहाउस को सैट से राहत मिल जाए। इस बारे में जानकारी के लिए एनएसई को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। पिछले हफ्ते प्राइस वाटरहाउस ने सेबी के आदेश के खिलाफ सैट का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने स्थगन देने से मना कर दिया, लेकिन मौजूदा क्लाइंट को सेवाएं जारी रखने की अनुमति दे दी। प्राइस वाटरहाउस और इसके दो साझेदारों एस गोपालकृष्णन और श्रीनिवास तल्लुरी को संयुक्त रूप से 13.1 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ 7 जनवरी 2009 से भुगतान की तारीख तक 12 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया गया है।
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