कोटक समिति की कुछ सिफारिशें होंगी लागू

श्रीमी चौधरी | मुंबई Jan 29, 2018 10:38 PM IST

सेबी कर रहा तैयारी

ठंडे बस्ते में प्रस्ताव

हितों के टकराव/नियमन के दोहराव पर निर्देश का प्रस्ताव
अनियमितता के मामले में ऑडिटरों पर सख्त कार्रवाई
स्वतंत्र निदेशकों का बीमा कवरेज

इन प्रस्तावों पर सेबी कर रहा विचार

सूचीबद्ध इकाइयों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद को अलग करना
अगर रॉयल्टी भुगतान कुल कारोबार का 5 फीसदी से ज्यादा हो तो विशेष प्रस्ताव लाया जाए
कीमत के प्रति संवेदनशील सूचनाओं को साझा करने के लिए औपचारिक प्रारूप बनाया जाए
लेखा समिति की भूमिका बढ़े

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) कारोबारी प्रशासन पर गठित उच्च स्तरीय कोटक समिति की सिफारिशों को आंशिक तौर पर लागू करने के पक्ष में है। मामले के जानकार शख्स ने बताया कि नियामक रिपोर्ट के अहम प्रस्तावों जैसे सूचीबद्ध कंपनियों में बोर्ड के ढांचे में बदलाव, कीमत-संवेदी सूचनाओं को साझा करने, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को रॉयल्टी भुगतान आदि को लागू करने को इच्छुक है। दूसरी ओर गैर-सूचीबद्ध सहायक इकाइयों पर नजर रखने, ऑडिटरों को समीक्षा के दायरे में लाने तथा सेबी के अंतर्गत क्षमता निर्माण जैसे सुझावों को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।

सेबी से जुड़े सूत्रों ने कहा, 'सेबी भारतीय उद्योग जगत में कारोबारी प्रशासन में सुधार लाने के लिए तत्पर है। लेकिन इसकी संवेदनशीलता और सूचीबद्ध कंपनियों पर इसके व्यापक असर को देखते हुए नियामक सतर्क रुख अपना रहा है। सेबी नियामकीय बाध्यता और कारोबारी सुगमता में संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है।' कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक उदय कोटक की अध्यक्षता वाली 25 सदस्यीय समिति ने पिछले साल अक्टूबर में उद्योग जगत में कारोबारी प्रशासन में सुधार के कई उपायों की सिफारिश की थी।

सूत्रों ने कहा कि सेबी ने उनमें से कुछ प्रमुख सुझावों को छांटा है जिसे पहले लागू किया जा सकता है। इनमें सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पद को अलग करना, बोर्ड के सदस्य नहीं रहने वाले प्रवर्तकों को सूचनाएं साझा करने तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारतीय इकाइयों द्वारा अपने विदेशी प्रवर्तक को किए जाने वाले रॉयल्टी भुगतान की व्यापक जांच करना शामिल है। इसके अलावा लेखा समिति की भूमिका और बोर्ड के मूल्यांकन संबंधी प्रस्ताव को भी कुछ बदलावों के साथ लागू किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक सेबी बजट के बाद 10 फरवरी को होने वाली बोर्ड बैठक में इस पर विचार कर सकता है।

समिति के कुछ प्रस्तावों पर कंपनी मामलों के मंत्रालय और भारतीय सनदी लेखा संस्थान (आईसीएआई) की आपत्ति के बाद उसे टाला जा सकता है। 'मैटेरियल सब्सिडी' की परिभाषा में संशोधन पर संभवत: मंत्रालय ने आपत्ति जताई है।  केपीएमजी इंडिया के पार्टनर साईं वेंकटेश ने कहा, 'सेबी और कंपनी मामलों के मंत्रालय इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए प्रतिबद्घ है। ऐसे में उन्हें मौजूदा नियमनों के साथ व्यापक सामंजस्य बिठाना होगा। सेबी को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सूचीबद्ध फर्मों की प्रशासन की प्रणाली उनकी गैर-सूचीबद्ध इकाइयों के लिए भी प्रभावी हों।'

स्वतंत्र निदेशकों के लिए बीमा कवर, बोर्ड की बैठकों की संख्या जैसे प्रस्तावित सुझावों को शायद सेबी से हरी झंडी नहीं मिल पाएगी। सेबी को विभिन्न पक्षकारों से इस रिपोर्ट पर सैकड़ों प्रतिक्रियाएं मिली हैं। सेबी की विशेषज्ञ समिति ने जो सुझाव दिए हैं उनमें कहा गया है कि 40 फीसदी से अधिक सार्वजनिक शेयरधारिता वाली कंपनियों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद को अलग किया जाना चाहिए और यह अप्रैल 2020 से प्रभावी हो।  सार्वजनिक क्षेत्र सहित कई कंपनियों में एक ही व्यक्ति चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद पर काबिज हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, कोल इंडिया, विप्रो, एनटीपीसी, भारत पेट्रोलियम, नेस्ले इंडिया और जेएसडब्ल्यू प्रमुख हैं।

वैश्विक स्तर पर दोनों पदों पर अलग-अलग व्यक्ति होते हैं। स्टेकहोल्डर इम्पावरमेंट सर्विसेज के सह-संस्थापक जेएन गुप्ता ने कहा, 'इससे हितों के टकराव को रोका जा सकता है।' गुप्ता भी इस समिति में शामिल थे। उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति के हाथ में ज्यादा अधिकार रहने से बोर्ड स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर पाता है।

सूचनाओं को साझा करने के मामले में समिति ने सुझाव दिया है कि इसके लिए एक विशेष व्यवस्था बनाई जाए, जिससे प्रबंधन संवेदनशील सूचनाओं को 'निर्दिष्टï व्यक्ति' के साथ साझा कर सकें।मौजूदा प्रारूप के तहत ऐसी जानकारियों केवल निर्णय से संबंधित प्रक्रिया से जुड़े लोगों के साथ ही साझा की जा सकती है।  प्रॉक्सी फर्म इनगवर्न के प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमणयन ने कहा, 'इससे स्पष्टता आएगी कि किसे सूचनाएं साझा करनी हैं। इसके साथ ही प्रवर्तकों एवं संबंधित पक्षों के साथ सूचना साझा करने की मौजूदा अनौपचारिक व्यवस्था को औपचारिक बनाया जा सकता है।'

घरेलू कंपनियों द्वारा विदेशी प्रवर्तकों को उच्च रॉयल्टी भुगतान पर समिति की सिफारिशों को भी सेबी लागू करने की संभावना तलाश रहा है। समिति का सुझाव है कि 5 फीसदी से अधिक राजस्व का रॉयल्टी के तौर पर भुगतान  के लिए सार्वजनिक शेयरधारकों से मंजूरी लेने की जरूरत होनी चाहिए।
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