ब्लैक फ्राइडे: बाजार हुआ धड़ाम

बीएस संवाददाता | मुंबई Feb 02, 2018 10:12 PM IST

शेयरों में निवेश पर ज्यादा कर लगाने और अमेरिका में बॉन्ड का प्रतिफल बढऩे से घरेलू बाजार में बेंचमार्क सूचकांक में आज जबरदस्त गिरावट आई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 840 अंक लुढ़ककर 35,907 पर बंद हुआ, वहीं नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 256 अंक फिसलकर 10,760 पर बंद हुआ। बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने की सरकार की घोषणा के बाद नवंबर 2016 के बाद यह एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट है। बजट के एक दिन बाद वर्ष 2009 के बाद बाजार का यह सबसे खराब प्रदर्शन रहा।
 
स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। बाजार में गिरावट से निवेशकों की पूंजी में करीब 4.6 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी, वहीं सूचीबद्घ कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 150 लाख करोड़ रुपये से भी कम रह गया। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को हटाए बिना दीर्घावधि पूंजी लाभ कर लगाने से निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है। इसके साथ ही 2019 के आम चुनावों को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा खर्च करने से राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बढऩे की आशंका से भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई।
 
10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड का प्रतिफल 2.8 से बढ़कर 3 फीसदी होने से दुनिया भर के बाजारों में भी गिरावट आई। ज्यादातर एशियाई बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजार  1 फीसदी गिरावट पर कारोबार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बॉन्ड प्र्रतिफल के 3 फीसदी पर पहुंचने से निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो आवंटन पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है क्योंकि बॉन्ड बाजार इक्विटी की तुलना में ज्यादा आकर्षक दिख रहे हैं। घरेलू बाजार में 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति का प्रतिफल भी 7.68 फीसदी तक बढ़ गया था लेकिन बाद में 7.56 फीसदी पर बंद हुआ, जो कल के बंद भाव से 4 आधार अंक कम है लेकिन बजट के पहले के दिन के बंद स्तर से 13 आधार अंक अधिक है। विशेषज्ञों को आशंका है कि राजकोषीय समेकन में देरी और बॉन्ड प्रतिफल में तेजी से भारतीय रिजर्व बैंक ज्यादा सतर्क रुख अपना सकता है। रिजर्व बैंक 7 फरवरी को नीतिगत दरों पर निर्णय करेगा।
 
आज की गिरावट में सबसे ज्यादा मार बैंकिंग शेयरों पर पड़ी और बीएसई बैंकेक्स 3 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ। नोमुरा के इंडिया इक्विटी रिसर्च प्रमुख सायन मुखर्जी ने कहा, 'उम्मीद से ज्यादा राजकोषीय घाटे की वजह से सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल बढ़ा है। जुलाई 2017 से इसमें 110 आधार अंक की वृद्घि आई है। इसके साथ ही सरकार ने 10 फीसदी का दीर्घावधि पूंजी लाभ कर भी लगाने की घोषणा की है। इन सब कारणों से बाजार में गिरावट आई है।' बजट सेे पहले बाजार में खासी तेजी देखी जा रही थी और जनवरी में सेंसेक्स करीब 5 फीसदी तक बढ़ा है। बाजार में यह तेजी विदेशी निवेशकों के दम पर आई थी जिसने करीब 2 अरब डॉलर निवेश किया था।
 
बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के इंडिया इक्विटी स्ट्रैटजिस्ट संजय मुकिम ने कहा, '2018 का बजट प्रस्ताव उम्मीद के अनुरूप ही रहा। इसमें ग्रामीण भारत को लाभ पहुंचाया गया है लेकिन पहले से ही तेजी पर सवार बाजार इससे उत्साहित नहीं हुआ।' उन्होंने दिसंबर 2018 तक एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स का लक्ष्य 32,000 तय किया है। बीएसई के सभी सेक्टोरियल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। रियल्टी सूचकांक में सबसे ज्ज्यादा 6.3 फीसदी की गिरावट आई। कुल शेयरों में से केवल 295 बढ़त पर जबकि 2,548 गिरावट के साथ बंद हुए। बजाज ऑटो, ऐक्सिस बैंक, मारुति सुजूकी और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। 
 
विदेशी निवेशकों ने 950 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की जबकि घरेलू निवेशकों ने 510 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। बंबई स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स में शुक्रवार को 840 अंक की जोरदार गिरावट आई। इससे निवेशकों की बाजार हैसियत कुल मिलाकर 4.6 लाख करोड़ रुपये नीचे आ गई। सेंसेक्स में भारी गिरावट से बीएसई की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 4,58,581.38 करोड़ रुपये घटकर 1,48,54,452 करोड़ रुपये रह गया।
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