दूरसंचार क्षेत्र में कर की समीक्षा पर ट्राई का जोर

किरण राठी | नई दिल्ली Feb 02, 2018 10:22 PM IST

दूरसंचार नियामक ट्राई का मानना है कि दूरसंचार क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और क्षेत्र की वृद्धि के लिए लाइसेंस ढांचे तथा विभिन्न प्रकार के करों की गणना की समीक्षा होना चाहिए। पिछले 2 दशक में बाजार में काफी बदलाव आ चुके हैं और फोन कॉल का बाजार अब डाटा आधारित होता जा रहा है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2018 पर दूरसंचार विभाग को भेजी अनुसंशाओं में कहा कि लाइसेंस शुल्क और स्प्रेक्ट्रम प्रयोग शुल्क ढ़ाचे की समीक्षा के साथ ही दूसरे कर की दरों की भी समीक्षा करनी चाहिए क्योंकि अब अनेक प्रक्रियागत बदलाव आ चुके हैं। अब स्प्रेक्टम का आवंटन बोली प्रक्रिया के तहत होता है और टेलीकम्यूनिकेशंस नेटवर्क डिजिटल भारत की प्रगति का एक बुनियादी ढ़ांचा बन गया है। नियामक का कहना है कि विभिन्न करों को लगाने का वर्तमान ढ़ांचा दो दशक पुराना है और अब बाजार फोन कॉल से इंटरनेट डाटा की ओर शिफ्ट हो गया है। इससे सेवा प्रदाताओं को सेवाओं का ऐसा पैकेज देना पड़ रहा है जिसमें कुछ सेवाओं के लिए लाइसेंस है तो कुछ के लिए नहीं। ट्राई का कहना है कि ऐसे में सकल राजस्व एवं इसके कारकों की समीक्षा करना बेहतर उपाय हो सकता है। सकल राजस्व तथा समायोजित सकल राजस्व से जुड़े हुए अनेक मामले विभिन्न फोरम में लंबित पड़े हैं और इन्हें जल्द से जल्द निपटाया जाना चाहिए।
 
वर्तमान में दूरसंचार क्षेत्र अनेक वित्तीय समस्याओं का सामना कर रहा है जिसमें स्प्रेक्ट्रम भुगतान की समयसीमा बढ़ाकर 16 वर्ष करना शामिल है। हालांकि जल्दी ही ब्याज दरों में बदलाव की घोषणा से वित्तीय तनाव कम हो सकता है। सरकार मार्च 2018 तक राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 2018 लाने की योजना बना रही है जिसमें 2022 को लाक्षित कर योजनाएं बनाई जा रही हैं। गौरतलब है कि 2022 में भारत स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करेगा। ट्राई ने विभिन्न हितधारकों से बातचीत कर अपने सुझाव दिए हैं। चूंकि इस नीति से विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा इसलिए ट्राई का सुझाव है कि इसका नाम 'सूचना एवं संचार प्रोद्योगिकी नीति 2018' रखा जाए। 
 
देश में समावेशी सामाजिक-आर्थिक वृद्धि के लिए यह आवश्यक है कि स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं के लाभ शहरी लोगों के साथ ही ग्रामीण लोगों तक पहुंचें और इसके लिए कनेक्टिविटी एक बड़ी भूमिका निभाएगी।  स्पेक्ट्रम प्रबंधन के बारे में नियामक ने कहा कि वायरलेस नेटवर्क शुरू करने के लिए यह सबसे अहम संसाधन है, इसलिए सभी उपलब्ध हवाई तरंगों का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा। 
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