टाटा की क्रॉस-होल्डिंग योजना पर असर

कृष्ण कांत और देव चटर्जी | मुंबई Feb 05, 2018 10:06 PM IST

आम बजट में प्रस्तावित लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर विभिन्न सूचीबद्ध कंपनियों में प्रवर्तक की हिस्सेदारी को एकीकृत करना टाटा समूह के लिए अगले वित्त वर्ष (2018-19) से महंगा बना देगा। हालांकि टाटा समूह के पास इस कवायद को पूरा करने के लिए 31 मार्च तक का समय है और वह भी कर दायरे में आए बिना। टाटा संस को छोड़कर समूह की विभिन्न कंपनियों की अन्य सूचीबद्ध टाटा कंपनियों में पिछले साल दिसंबर के आखिर तक करीब 214.6 अरब रुपये की हिस्सेदारी थी। इस बजट के बाद अगर वे अपनी हिस्सेदारी टाटा समूह को बेचती हैं तो समूह की कंपनियों को टाटा की अन्य कंपनियों में इक्विटी निवेश पर होने वाले लाभ पर 10 फीसदी एलटीसीजी कर देना होगा। कराधान में बदलाव से सभी कंपनियों के प्रवर्तक प्रभावित होंगे जो क्रॉस-होल्डिंग घटाना चाहते हैं या प्रवर्तक समूह के भीतर मालिकाना हक में बदलाव करना चाहते हैं।
 
हालांकि टाटा संस इस साल मार्च के आखिर तक क्रॉस-होल्डिंग को एकीकृत कर सकती है और वह भी एलटीसीजी कर दिए बिना। कैटलिस्ट एडवाइजर्स एलएलपी के मैनेजिंग पार्टनर केतन दलाल ने कहा, 31 मार्च तक सूचीबद्ध शेयरों की बिक्री पर एलटीसीजी कर नहीं लगेगा। 31 जनवरी तक शेयरों में हुई बढ़ोतरी पर ग्रैंडफादरिंग का प्रावधान है, ऐसे में अगर अगले वित्त वर्ष के शुरू में शेयर में इजाफा नहींं होता है तो उस हद तक लागत आधार में बढ़ोतरी से पूंजीगत लाभ सीमित होगा। टाटा संस स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से रकम जुटा रही है जो मुख्य रूप से टाटा स्टील के राइट्स इश्यू खरीदने और दूरसंचार का कर्ज चुकाने के लिए है। एक अग्रणी ऑडिट फर्म के पार्टनर ने कहा, टाटा संस समूह की अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर खरीदने के मामले में एक समयसीमा के दायरे में होगी। ग्रैंडफादरिंग के प्रावधान के चलते टाटा के लिए शेयर खरीदने और मार्च के आखिर तक यह कवायद पूरी करने के बजाय इंतजार करने का मतलब बनता है।
 
नए चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तहत टाटा संस समूह की अन्य सूचीबद्ध कंपनियों की हिस्सेदारी पिछले साल खरीदती रही है। यह विश्लेषण टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों की दिसंबर 2017 की शेयरधारिता पर आधारित है। समूह की कंपनियों की क्रॉस-होल्डिंग संबंधित कंपनियों में प्रवर्तक की होल्डिंग का हिस्सा है। हिस्सेदारी का मूल्यांकन 2 फरवरी 2017 को संबंधित कंपनियों की शेयर कीमत पर आधारित है। मार्च 2017 के आखिर में टाटा की 19 कंपनियों (टाटा संस को छोड़कर) के पास समूह की सूचीबद्ध 26 कंपनियों में क्रॉस-होल्डिंग थी। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास सबसे बड़ा पोर्टफोलियो है और 13 सूचीबद्ध कंपनियों में मौजूदा शेयर कीमत के मुताबिक 56.3 अरब रुपये की हिस्सेदारी है। इसके बाद टाटा स्टील का स्थान है जिसके पास मौजूदा कीमत के हिसाब से नौ सूचीबद्ध कंपनियों की 42.3 अरब रुपये की हिस्सेदारी थी। बड़े इक्विटी निवेश वाली समूह की अन्य कंपनियों में टाटा केमिकल (39 अरब रुपये), टाटा पावर (10.5 अरब रुपये), टाटा मोटर्स (7 अरब रुपये) और इंडियन होटल्स (2.2 अरब रुपये) शामिल हैं।
 
विश्लेषकों ने कहा कि टाटा की कंपनियां अपनी क्रॉस होल्डिंग अपनी पैरेंट टाटा संस को नहीं बेचेंगी क्योंकि इनमें से कई सहायक में रणनीतिक निवेश था या ये एक ही उद्योग में परिचालन कर रही हैं। उदाहरण के लिए टाटा स्टील टिनप्लेट कंपनी, टाटा मेटलिक्स, टायो रोल्स, टाटा स्पंज आयरन की प्रवर्तक है, जो लोह व इस्पात कारोबार में सहायक हैं। 
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