बाजार में और गिरावट मुमकिन, निवेशक रहें सतर्क

पुनीत वाधवा | नई दिल्ली Feb 06, 2018 09:55 PM IST

मंगलवार को भारतीय सूचकांकों एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स व निफ्टी-50 में में बड़ी गिरावट के बावजूद बाजार के जानकारों को मानना है कि आने वाले समय में देसी इक्विटी में और गिरावट की संभावना है। चूंकि बाजार में गिरावट वैश्विक वजहों मुख्य रूप से अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में इजाफे के चलते हुई है, लिहाजा इनका मानना है कि भारतीय बाजार के स्थिर होने से पहले कुछ और कारोबारी सत्र में मंदी का रुख बना रह सकता है। बुरी से बुरी स्थिति में निफ्टी-50 9,500 के स्तर तक फिसल सकता है।
 
जूलियस बेयर समूह के शोध प्रमुख (एशिया) मार्क मैथ्यूज ने कहा, बिकवाली जिस वजह से हो रही है वह है बॉन्ड के प्रतिफल में इजाफा। शुक्रवार तक एसऐंडपी तीन फीसदी गिरे बिना 310 दिन के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका था, जो 1980 के बाद की सबसे लंबी रफ्तार थी, पर अब वह टूट गई है। हमारा मानना है कि तीन सप्ताह तक गिरावट और बरकरार रह सकती है। 1 फरवरी को बजट पेश किए जाने के बाद से अब तक एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स 2,200 अंक यानी 6.2 फीसदी टूट चुका है। कमजोर वैश्विक संकेतों के अलावा इक्विटी पर लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर लगाने से सेंटिमेंट पर असर पड़ा। एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजिज के मुख्य कार्याधिकारी एंड्यू हॉलैंड ने कहा, बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के बावजूद बाजारों में तेजी जारी थी। मंगलवार की गिरावट से मुझे आश्चर्य नहीं हुआ है। अल्पावधि में स्थिर होने से पहले बाजार में तीन फीसदी की और गिरावट आ सकती है। गिरावट से अतिरिक्त नकदी बाहर निकल जाएगी। मिजहो बैंक के भारतीय रणनीतिकार तीर्थंकर पटनायक का भी मानना है कि बाजार के लिए और मुसीबतें बाकी है। उन्होंने कहा, यह असंभव है कि ऐसी गिरावट सिर्फएक दिन का घटनाक्रम होगा। इक्विटी बाजार में गिरावट पर बॉन्ड प्रतिफल (खास तौर से अमेरिका व जर्मनी में) में बढ़ोतरी का असर पड़ा है। हम वैश्विक स्तर पर प्रगति के अच्छे आंकड़ों की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन हमें महंगाई में समान बढ़ोतरी की संभावना नहीं दिख र ही। बॉन्ड का प्रतिफल इक्विटी में ज्यादा खरीदारी की स्थितियां प्रतिबिंबित कर रहा है, जिसका ध्यान रखे जाने की दरकार है। अगर एसऐंडपी-500 दोबारा 25 फीसदी बढ़ता है (जैसा कि पिछले साल हुआ था) तो निफ्टी आसानी से 9,500 के स्तर से फिसल सकता है।
 
शेयर की रणनीति
 
ऐसे में आपके पोर्टफोलियो की रणनीति क्या होनी चाहिए?  अल्पावधि के परिदृश्य को देखते हुए विश्लेषकों ने खुदरा निवेशकों को किनारे बैठे रहने की सलाह दी है। हॉलैंड ने कहा, मुझे लगता है कि निवेशकों को इंतजार करना चाहिए और मामले को निपटने देना चाहिए। अगर वे पहले पांच फीसदी के सुधार में भाग नहीं ले पाते हैं तो आने वाले समय में और ज्यादा बढ़ोतरी होगी। बाजार को अपने हिसाब से चलने दें। क्षेत्र के लिहाज से यह समय अपने पोर्टफोलियो को पुनर्गठित करने और गुणवत्ता पर दोबारा ध्यान देने का है। मैं अल्पावधि के लिए प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और आईटी शेयरों के साथ रहूंगा। प्राइवेट बैंक और एनबीएफसी दो ऐसे क्षेत्र हैं जो मिजहो बैंक के पटनायक को भी पसंद हैं और उनका सुझाव है कि बाजार और टूटता है तो ये शेयर खरीदे जा सकते हैं। शेयरखान के प्रमुख हमांग जानी ने कहा, हम खुदरा निवेशकों के लिए इसे एक मौके के तौर पर देख रहे हैं।
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