क्रिप्टोकरेंसी : पोंजी योजनाओं की तरह इसमें जोखिम कई

संजय कुमार सिंह |  Feb 13, 2018 09:50 PM IST

भारत में आभासी मुद्राएं (क्रिप्टोकरेंसी) अनेक तरह की नियामकीय बाधाओं से जूझ रही हैं। जब तक इन पर कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं आ जाता, तब तक निवेशकों को इसमें निवेश करते समय सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। दिसंबर 2017 में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि आभासी मुद्राओं को कानूनी मान्यता नहीं है और इनके लिए कोई भी नियामकीय अनुमति अथवा सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय ने आगे कहा कि निवेशक अपने जोखिम पर इनमें निवेश करें क्योंकि तेजी से घटती-बढ़ती कीमतें एक बुलबुले की तरह हो सकती हैं और इनमें पोंजी योजनाओं के समान जोखिम हो सकता है।

 
आयकर विभाग ने आभासी मुद्राओं में लेनदेन करने वाले हजारों निवेशकों को नोटिस भेजकर कहा है कि वे पूंजीगत लाभ पर कर चुकाएं और अपनी सभी आभासी मुद्राओं तथा धन के स्रोत की घोषणा करें। कंपनी मामलों के रजिस्ट्रार (आरओसी) ने वैसे सभी व्यापार का पंजीकरण करना बंद कर दिया है जिनके नाम से ऐसा लगता है कि वे आभासी मुद्राओं में लेनदेन कर सकते हैं। हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आभासी मुद्रा में लेनदेन करने वाली कंपनियों और एक्सचेंजों के खातों की जांच करने के लिए कहा था। आरबीआई ने सीधे तौर पर खाते बंद करने के लिए नहीं कहा लेकिन यह चेतावनी अनेक खातों के बंद होने का कारण बन गई। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बिटसॉक्स के संस्थापक आशीष अग्रवाल कहते हैं, 'नियामकों को यह तय करना करना चाहिए कि आभासी मुद्रा को अनुमति देनी है या नहीं। वर्तमान हालात में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए बैंकों को भी नहीं पता कि वे क्या करें।'
 
भारतीय क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के पक्ष में एक बात यह है कि अधिकांश ने खाता खोलने से पहले केवाईसी (ग्राहक को जानो) प्रक्रिया का पालन किया है। अधिक जोखिम के चलते कुछ बैंक क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज से लेनदेन बंद कर सकते हैं, लेकिन यदि एक्सचेंज उचित केवाईसी प्रक्रिया और पूंजी के साथ काम करते हैं तो जोखिम को कम किया जा सकता है।   विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें सबसे अधिक जोखिम वैसे उपभोक्ताओं को है जो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज में ट्रेडिंग कर रहे हैं। अग्रवाल कहते हैं, 'निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए इस समय अपने कुल पोर्टफोलियो का 5 प्रतिशत से अधिक क्रिप्टोकरेंसी में निवेश ना करें। 
 
पोंजी योजनाओं को भी आईसीओ की तरह भी पेश किया जा सकता है, जिससे प्रवर्तक और शुरुआती निवेशक तो लाभ कमा लेंगें और बाद में निवेश करने वालों को घाटा उठाना पड़ेगा। साथ ही, विदेशी एक्सचेंज के मामले में नियामक संबंधी जोखिम भी हैं। इसलिए इनसे दूर रहना चाहिए।'  जोखिम से दूर रहने वाले निवेशकों को अपनी क्रिप्टोकरेंसी को रुपये में बदल लेना चाहिए। इससे हुए लाभ की सूचना देने के साथ ही इस पर कर अदा करना चाहिए। जोखिम उठाने की क्षमता वाले निवेशक आभासी मुद्रा को रोक कर रख सकते हैं लेकिन उन्हें भी कोई नई खरीदीरी नहीं करनी चाहिए। नियामकीय दवाब में कुछ एक्सचेंज अपना व्यापार बंद भी कर सकते हैं। तिवारी कहते हैं, 'आभासी मुद्रा की प्राइवेट की अपने पास रखें। अगर आपका एक्सचेंज बंद हुआ तो आप अपनी मुद्रा को दूसरे एक्सचेंज पर बेच सकेंगे। लेकिन यदि आपके पास प्राइवेट की नहीं है और एक्सचेंज बंद हो जाता है तो आप अपनी सारी पूंजी खो देंगे।'
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