बोली पर रहेगी सीसीआई की नजर

देव चटर्जी | मुंबई Feb 15, 2018 09:54 PM IST

सीमेंट और स्टील क्षेत्र की दबाव वाली परिसंपत्तियों के बोलीदाताओं को दबाव बोली में विजयी रहने और लेनदारों की मंजूरी के बाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मंजूरी लेनी होगी, न कि बोली लगाने के समय। यह कहना है कॉरपोरेट वकीलों व बोली लगाने वालों का। बिनानी सीमेंट के लिए अल्ट्राटेक की बोली और भूषण स्टील, भूषण पावर के लिए जेएसडब्ल्यू, टाटा स्टील की बोली पर प्रतिस्पर्धियों ने सीसीआई के नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं, जो किसी एक कंपनी के हाथ उद्योग की क्षमता के संकेंद्रण को रोकता है। बोली लगाने वालों ने कहा कि आईबीसी की प्रक्रिया को पूर्व के बीआईएफआर (बोर्ड ऑफ इंडस्ट्रियल ऐंड फाइनैंशियल रीकंस्ट्रक्शन) के मामलों की तरह सीसीआई के नियमों से छूट मिलनी चाहिए, जहां प्रतिस्पर्धा कानून लागू नहीं होता।
 
एक बोलीदाता ने कहा, प्रतिस्पर्धा के कोण से इस बारे में सरकार ने अभी कुछ स्पष्ट नहीं किया है, जिस पर कुछ प्रतिस्पर्धियोंं ने कुछ सवाल उठाए है। बिनानी सीमेंट के लिए अल्ट्राटेक बोली लगा रही है और प्रतिस्पर्धा में पांच कंपनियां डालमिया भारत सीमेंट, स्टॉक ब्रोकर राकेश झुनझुनवाला, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, रामको सीमेंट और हाइडलबर्ग सीमेंट हैं। कुछ बोलीदाताओं ने अल्ट्राटेक की बोली का यह कहते हुए विरोध किया है कि कंपनी के पास पहले से ही 8.9 करोड़ टन सालाना की क्षमता है, ऐसे में इसे बिनानी सीमेंट के लिए बोली लगाने की अनुमति नहींं दी जानी चाहिए।
 
बिनानी सीमेंट भारत, चीन और दुबई में 1.12 करोड़ टन क्षमता के संयंत्र हैं और राजस्थान में इसके पास अच्छा खासा चूना पत्थर का भंडार है, जो मौजूदा सीमेंट कंपनियों मसलन अल्ट्राटेक को अपनी क्षमता विस्तार के लिए आकर्षक बनाता है। अगर अल्ट्राटेक कंपनी की बोली जीतती है तो इसकी एकल क्षमता 10 करोड़ टन सालाना के पार चली जाएगी। भारत में कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 42.5 करोड़ टन सालाना है, लेकिन देसी बाजार में कम मांग के कारण सीमेंट उद्योग सिर्फ 28 करोड़ टन सालाना का उत्पादन कर रहा है।
 
ट्राइलीगल की राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा प्रमुख निशा कौर ने कहा, बिनानी सीमेंट के लिए अल्ट्राटेक की प्रस्तावित बोली के बाद कम संकेंद्रण, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान के बाजारों में कम से कम 7-8 कंपनियों की मौजूदगी और हालिया विस्तार व इस बाजार में नई कंपनियों के प्रवेश सीसीआई के चलन के मुताबिक है, ऐसे में बोली प्रतिस्पर्धा से जुड़ी कोई समस्या पैदा नहीं करेगा। ऐसे ही सवाल जेएसडब्ल्यू व टाटा स्टील की तरफ से भूषण की दो कंपनियों की बोली पर उठाए गए हैं। कहा जा रहा है कि अगर जेएसडब्ल्यू या टाटा दोनों कंपनियों की बोली में विजयी रहती है या फिर दोनों कंपनियां भूषण की एक-एक कंपनी के लिए बोली जीतती है तो विजेता ऑटो व फ्लैट स्टील के मामले में एकाधिकार की स्थिति में होगी। लेकिन जेएसडब्ल्यू स्टील के अधिकारियों ने इस सिद्धांत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दिलचस्पी रखने वाले पक्षकारों की तरफ से देर से उठाए गए सवाल सिर्फ और सिर्फ आईबीसी की पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए है ताकि बोलीदाताओं की रुचि खत्म हो जाए।
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