एमएससीआई ने की भारतीय एक्सचेंजों की आलोचना

बीएस संवाददाता | मुंबई Feb 16, 2018 10:05 PM IST

वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने वैश्विक एक्सचेंजों के साथ डेटा साझेदारी समझौते को खत्म  करने के लिए भारतीय एक्सचेंजों की आलोचना की है। एमएससीआई ने कहा है कि तीन घरेलू एक्सचेंजों द्वारा की गई यह घोषणा सही नहीं है क्योंकि इससे भारतीय बाजार में पहुंच के लिए अवरोध पैदा होगा। उसने भारतीय नियामकों और एक्सचेंजों से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है क्योंकि इससे ट्रेडिंग में उथल-पुथल मच सकता है। यदि ऐसा हुआ तो एमएससीआई अपने वैश्विक सूचकांकों में भारत के भारांश में कटौती करने के लिए मजबूर होगी।
 
भारत के दो प्रमुख एक्सचेंज- नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने 9 फरवरी को एक संयुक्त विज्ञप्ति जारी कर कहा था कि वे विदेशी एक्सचेंजों के साथ अपने डेटा-फीड करारों को खत्म कर रहे हैं ताकि घरेलू प्रतिभूतियों में विदेशी ट्रेडिंग को रोका जा सके। विज्ञप्ति में कहा गया था कि इस समझौते की नोटिस अवधि खत्म होने के बाद अगस्त 2018 में यह निर्णय प्रभावी होगा। सूचकांक प्रदाता ने एक विज्ञप्ति में कहा, 'भारतीय इक्विटी बाजार में अंतरराष्टï्रीय संस्थागत निवेशकों की पहुंच के लिए यह स्पष्टï तौर पर एक नकारात्मक खबर है।' उसने संकेत दिया है कि ऐसे में वह अपने वैश्विक सूचकांकों में भारत के भारांश में कटौती कर सकती है। इस अग्रणी सूचकांक प्रदाता के एमएससीआई एमर्जिंग मार्केट (ईएम) इंडेक्स जैसे सूचकांकों पर वैश्विक एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) की नजर रहती है जो कई लाख करोड़ डॉलर की परिसंपत्तियों का परिचालन करते हैं।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि एमएससीआई द्वारा ईएम सूचकांक में भारत के भारांश में 100 आधार अंकों की कटौती से 1 अरब डॉलर से अधिक रकम की निकासी हो सकती है। एमएससीआई के ईएम सूचकांक में भारत का भारांश फिलहाल करीब 8 फीसदी है जबकि एमएससीआई एशिया पैसेफिक (जापान के अलावा) सूचकांक में भारत का भारांश 12 फीसदी है। इससे भारत को एमएससीआई ईएम सूचकांक में प्रत्येक 100 डॉलर के निवेश के लिए 8 डॉलर आकर्षित करने में मदद मिलती है। एमएससीआई ने कहा, 'खरीद-फरोख्त के मूल्य संबंधी आंकड़े पर रोक अन्य बाजार में एमएससीआई के ईएम सूचकांक के लिए असंगत होगा और इससे दुनिया भर के बाजारों में वित्तीय उत्पादों की ट्रेडिंग में अप्रत्याशित उथल-पुथल पच सकती है।' इससे पहले अमेरिका में एक्सचेंजों के संगठन फ्यूचर इंडस्ट्री एसोसिएशन ने भी भारतीय एक्सचेंजों की इस पहल की आलोचना की थी।
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