एनएसई में होंगी स्टार्टअप कंपनियां

करण चौधरी और अजय मोदी | नई दिल्ली Feb 26, 2018 09:38 PM IST

एनएसई करेगा पहल

 एनएसई 3 साल में कंपनियों को 50 अरब डॉलर जुटाने में करेगा मदद

एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विक्रम लिमये के अनुसार अगले 12 से 24 महीने में निवेशकों से अरबों रुपये कमाने वाली कई कंपनियां बाहर निकलने की संभावना तलाशेंगी
एनएसई द्वारा चीन के मॉडल को दोहराए जाने की संभावना है जहां शुरू में सूचीबद्धता के लिए विदेश में संभावना तलाशने वाली कई कंपनियां अब उसी देश में दिलचस्पी बढ़ा रही हैं

भारत की टेक स्टार्टअप और ई-कॉमर्स कंपनियां जल्द भारतीय शेयर बाजार में दिख सकती हैं। एसजीएक्स व नैसडेक से मुकाबला करने के लिए एनएसई इन कंपनियों को 50 अरब डॉलर जुटाने में मदद करने की संभावना तलाश रहा है और इस प्रक्रिया में निजी इक्विटी और उद्यम फंड बाहर निकल सकते हैं। अपने प्लेटफॉर्म पर एसएमई को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद एनएसई ने फ्लिपकार्ट, एमेजॉन इंडिया के साथ साथ कई छोटी कंपनियों को भी अपने नए एमर्ज आईटी प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कराने की योजना बनाई है। 

हालांकि एनएसई किसी छोटे निवेशक को आकर्षित नहीं कर रहा है, लेकिन लंबी पूंजी निवेश करने में सक्षम अमीर निवेशकों (एचएनआई) पर ध्यान दे रहा है। एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विक्रम लिमये के अनुसार अगले 12 से 24 महीने में निवेशकों से अरबों रुपये कमाने वाली कई कंपनियां बाहर निकलने की संभावना तलाशेंगी जिससे यह प्लेटफॉर्म वृद्धि  के लिए सूचीबद्धता के लिहाज से उपयुक्त मंच बन जाएगा। 

वह कहते हैं, 'पिछले 5 से 7 वर्षों मे बड़ी पूंजी ऐसी कंपनियों में निवेश की गई। लगभग 1,500 कंपनियों ने इस तरह का निवेश आकर्षित किया। हमें विश्वास है कि अगले 12 से 24 महीनों में इनमें से कई कंपनियां सूचीबद्धता को बाहर निकलने के अवसर के तौर पर देखेंगी।' उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी-आधारित कंपनियों के लिए धारणा में बदलाव को देखते हुए भारत में सूचीबद्ध होना उनके लिए सही अवसर है।

लिमये ने कहा, 'ऐतिहासिक रूप से इन कंपनियों का स्वाभाविक तौर पर झुकाव विदेशी सूचीबद्धता पर रहा है, लेकिन भारतीय पूंजी बाजार में काफी बदलाव आया है, इसलिए घरेलू तौर पर आईपीओ लाना इन कंपनियों के लिए सही विकल्प होगा।' एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर लगभग 300 एसएमई सूचीबद्ध हैं। उम्मीद है कि इस प्लेटफॉर्म पर प्रौद्योगिकी और ई-कॉमर्स क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के बाद प्रौद्योगिकी कंपनियां भी सूचीबद्धता में दिलचस्पी दिखाएंगी। नोडल एजेंसी ने यह जानने के लिए निजी इक्विटी कंपनियों और उद्यम फंडों आदि से कई दौर की बातचीत की है कि क्या इस प्लेटफॉर्म पर सभी कंपनियों को सूचीबद्ध किया जा सकता है।

एनएसई द्वारा चीन के मॉडल को दोहराए जाने की संभावना है जहां शुरू में सूचीबद्धता के लिए विदेश में संभावना तलाशने वाली कई कंपनियां अब वहां की धरती पर ही दिलचस्पी बढ़ा रही हैं। एनएसई को लगभग 500 अरब डॉलर के आईपीओ हासिल हुए हैं। सेबी हालांकि नियमों में बदलाव के मामले में दूरदर्शी रहा है ताकि जिन कंपनियों ने मुनाफा न कमाया हो वह भी प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हो सके। ऐसे में उनका कहना है कि सूचीबद्धता के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए 5 करोड़ डॉलर या ज्यादा मूल्यांकन वाली कंपनियों को सूचीबद्धता के लिए आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही सेबी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि स्टार्टअप की तरफ से हुए खुलासे वास्तविक समय में हो।

साथ ही एनएसई की सूचीबद्धता प्रमुख ईशिता वोरा ने कहा कि ये न तो लाभांश वाले स्टॉक हैं और न ही एन्युटी आधारित ग्रोथ स्टॉक। निवेशक चाहते हैं कि उनका 10 रुपया अगले चार से पांच सालों में 40 रुपये हो जाए। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि खुदरा निवेशक इन शेयरों में भागीदारी न करे। आईटीपी पर न्यूनतम सबक्रिप्शन 10 लाख रुपये रखा गया है, जो एचएनआई के लिए इसे उपयुक्त विकल्प बनाता है। ये वैसे एचएनआई के लिए है जिन्हें बाजार की गहरी समझ है। खुदरा निवेशकों से कहा गया है कि जब ये शेयर ट्रेडिंग के लिए आ जाए तभी उसका हिस्सा बनें।
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