शेयर टूटने के बाद फंडों ने खरीदारी बढ़ाई

चंदन किशोर कांत | मुंबई Feb 27, 2018 10:06 PM IST

इस महीने स्टॉक मार्केट के मूल्यों में हुए 10 फीसदी के आसपास की गिरावट से उत्साहित इक्विटी फंड मैनेजरों ने स्टॉकों की अपनी खरीदारी बढ़ा दी है। अपने स्थापित रणनीति 'गिरावट में खरीदारी' का अनुसरण करते हुए उन्होंने स्टॉक में 100 अरब रुपये से अधिक का निवेश किया है। इसमें से अधिकांश निवेश पिछले तीन महीनों के दौरान हुआ और यह अप्रैल 2017 के बाद दूसरा सबसे बड़ा निवेश है। दिसंबर और जनवरी महीनों में जब स्टॉक मूल्यों में तेज उछाल आया था तब फंड मैनेजरों ने निवेश पर अंकुश लग दिया था। इन दो महीनों के लिए उनका मासिक निवेश क्रमश: 83 अरब रुपये और 90 अरब रुपये था। 
नतीजतन, उनके पास नकद राशि में इजाफा हुआ, साथ ही निवेशकों से आने वाले मासिक निवेश ने भी इसमें योगदान किया। फरवरी में शेयर मूल्यों में आई तेज गिरावट से अवसर सृजित हुए। ज्यादातर अच्छे स्टॉकों के मूल्यों में लघु अवधि में 10 फीसदी के आसपास गिरावट हुई थी। खरीदारी लार्ज कैप, मिड कैप काउंटरों सहित सभी तरह के स्टॉकों में हुई।
एसेल फाइनैंस असेट मैनेजमेंट के इक्विटी प्रमुख अमित निगम कहते हैं, 'जब आपके हाथों में अत्यधिक नकदी हो और बाजार तेजी से गिर रहा हो, तब अच्छे स्टॉकों को खरीदने के अलावा आपके पास दूसरा कौन सा विकल्प हो सकता है?'  
दूसरे फंड मैनेजरों का कहना है कि हर महीने अत्यधिक मात्र में नकदी आने की स्थिति में इसे लेकर बैठे रहना आसान नहीं होता है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं (एसआईपी) से आने वाला निवेश मासिक आधार पर 65 अरब रुपये की सीमा को पार कर गया है।  
हालिया स्टॉक गिरावट के दौरान जिन शेयरों ने फंड मैनेजरों का ध्यान खींचा उनमें टाटा मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, लार्सन ऐंड टुर्बो, मारुती सुजूकी, हिंडाल्को, मदरसन सुमी, सन फार्मास्यूटिकल, कोटक महिंद्रा बैंक, इंटरग्लोब एविएशन और आईटीसी शामिल हैं।   इनवेस्को म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) तहेर बादशाह ने कहा, 'हमने शेयर मूल्य में गिरावट के दौरान चुनिंदा काउंटरों पर पैसे निवेश किया। प्रत्येक शेयर जिसमें गिरावट आए जरूरी नहीं कि वह आकर्षक भी हो। हमें कुछ हद तक सुरक्षा और स्थायित्व की भी दरकार होती है।'  दो-तीन साल पहले की तुलना में अब फंड मैनेजमेंट कठिन हो चुका है। फंड मैनेजरों का ध्यान अब अधिक मुनाफा की बजाय अपने पोर्टफोलियो में स्थायित्व पर है। ज्यादातर का मानना है कि 2018 का साल अत्यधिक अस्थिर रहने वाला है। कुछ महीनों से वे संपत्ति आवंटन की सलाह मजबूती से दे रहे हैं।  
ज्यादातर फंड मैनेजरों को लगता है कि नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के बेंचमार्क निफ्टी 9,500 से नीचे नहीं जाएगा। एक फंड मैनेजर ने कहा कि जब तक बाजार मौजूदा रेंज में बरकरार है, भले ही यह अस्थिर रहे, हम धन निवेश करते रहेंगे।  
इस तरह से 2017-18 में इक्विटी फंड ने स्टॉकों में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे बाजार को मजबूत समर्थन मिला।  
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