तेल विपणन कंपनियों, बैंक व धातु शेयरों ने पीएसयू इंडेक्स को नीचे खींचा

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा | मुंबई/नई दिल्ली Mar 19, 2018 09:57 PM IST

सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के शेयर दबाव मेंं हैं क्योंकि एसऐंडपी बीएसई पीएसयू इंडेक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। दरअसल धातु, बैंक व तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर पीएसयू इंडेक्स पर पड़ा। एसऐंडपी बीएसई पीएसयू इंडेक्स सोमवार को करीब 2 फीसदी टूटकर 52 हफ्ते के निचले स्तर 7,844 अंक पर बंद हुआ जबकि एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स 0.76 फीसदी टूटा।  तेल विपणन कंपनियों के शेयरों मेंं गिरावट इस खबर के बीच दर्ज हुई कि सरकार नियंत्रित इंडियन ऑयल व भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन गेल इंडिया की 26-26 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकती है और एकीकृत ऊर्जा फर्म बनने के लिए सरकार को 20,000-20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान कर सकती है। आईओसी, बीपीसीएल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के शेयर में बीएसई पर 3 से 4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

 
आईओसी का शेयर 4 फीसदी टूटकर 52 फीसदी के निचले स्तर 176 रुपये पर आ गया और इस तरह से दो कारोबारी सत्र में इसकी गिरावट करीब 7 फीसदी पर पहुंच गई। गुरुवार को कंपनी का शेयर एक्स-बोनस हो गया था। आईओसी ने अपने शेयरधारकों को एक पर एक बोनस शेयर दिया है।आईडीबीआई रिसर्च के प्रमुख ए के प्रभाकर ने कहा, यह गिरावट आईओसी व बीपीसीएल की तरफ से गेल इंडिया की हिस्सेदारी खरीदने की योजना की खबर से आई। सरकार ऐसे साधन का इस्तेमाल राजस्व सृजित करने के लिए कर रही है और इसी वजह से ओएमसी समेत कई पीएसयू में गिरावट दर्ज हुई। मुझे नहीं लगता कि इन शेयरों की खरीद के लिए यह सही वक्त है। अगर ये शेयर यहां से 10 फीसदी और टूटते हैं तो निवेशक ओएमसी में नए निवेश पर विचार कर सकते हैं।
 
ओएमसी के लिए अन्य संकट आगामी राज्य चुनाव है, जिसके बारे में विश्लेषकों का मानना है कि यह उनके मार्जिन पर दबाव डाल सकता है क्योंंकि अगले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतें आगे बढ़ेंगी। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के नितिन तिवारी व आकर्ष चतुर्वेदी ने हालिया रिपोर्ट में कहा है, वित्त वर्ष 2019 में ओएमसी की चिंता विपणन मार्जिन को लेकर है क्योंकि पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, जिनमें से तीन राज्य कर्नाटक, राजस्थान व मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य हैं। मेरी राय में अगर कच्चे तेल में नरमी बनी रहती है तो ओएमसी को अपना विपणन मार्जिन बनाए रखने के लिए कीमतों में बहुत ज्यादा बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी। अन्य पीएसयू शेयरों में सेल, हिंदुस्तान कॉपर और एनएमडीसी के अलावा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरियंटल बैंंक ऑफ कॉमर्स में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। इंजीनियर्स इंडिया, आरईसी, बीईएमएल, कोल इंडिया, आरसीएफ और मंगलौर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स कुछ ऐसे पीएसयू शेयर थे जिनमें 3 से 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज हुई।
 
विश्लेषकोंं ने कहा, धातु कंपनियों के शेयर अमेरिकी सरकार की तरफ से स्टील व एल्युमीनियम पर शुल्क बढ़ाने के चलते प्रभावित हुए। इसके अलावा उनका मानना है कि पिछले कुछ महीनों से इन शेयरों में अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। आईडीबीआई कैपिटल के प्रभाकर का सुझाव है कि तब तक सतर्कता भरा रुख अपनाना चाहिए जब तक कि नए शुल्क के बारे में और स्पष्टता न आ जाए। भारत से अमेरिका को स्टील व एल्युमीनियम के निर्यात को देखते हुए जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (निवेश रणनीतिकार) गौरांग शाह का तेजी का नजरिया धातु क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों पर बना हुआ है। उनका दांव टाटा स्टील, हिंडाल्को, वेदांत, जेएसडब्ल्यू स्टील व सेल पर है। उनका कहना है कि लंबी अवधि में देसी उपभोग की स्थिति मजबूत बनी हुई है। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि अमेरिकी शुल्क से बहुत ज्यादा नकारात्मक असर पड़ेगा। मुझे धातु क्षेत्र के शेयरों में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं दिख रही है।
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