एस्सार स्टील की दूसरे दौर की बोली के लिए तैयार वीटीबी बैंक

देव चटर्जी | मुंबई Mar 20, 2018 10:01 PM IST

एस्सार स्टील के लिए दूसरे दौर की बोली आमंत्रित करने के लिए भारतीय लेनदार आज बैठक करने जा रहे हैं, वहीं रूस के वीटीबी बैंक न्यूमेटल में सिंगापुर के ट्रस्ट का 25 फीसदी हिस्सा खरीद रही है, जिसमें रेवंत रुइया लाभार्थी हैं। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि वह अगले दौर की बोली के पात्र हो जाए। वीटीबी बैंक यह हिस्सेदारी 2 अप्रैल से पहले खरीदेगी, जो दूसरे दौर के लिए बोली लगाने की आखिरी तारीख है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। पहले दौर में आर्सेलरमित्तल की बोली भी खारिज हो गई और यह कंपनी उत्तम गैल्वा की तरफ से लेनदारों को एकमुश्त भुगतान की पेशकश और सरकार की तरफ से दिवालिया संहिता में बदलाव पर टकटकी लगाए हुए है। वकीलों का कहना है कि केएसएस पेट्रोन में आर्सेलरमित्तल के प्रवर्तक एलएन मित्तल की 33 फीसदी हिस्सेदारी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
 
अलायंस लॉ के प्रबंध साझेदार आर एल लूना ने कहा, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि पूर्व के सभी कर्ज पुनर्गठन बेकार हो गए हैं और कर्ज का पुनर्गठन सिर्फ एनसीएलटी की प्रक्रिया के जरिए ही होना चाहिए। ऐसे में भारतीय स्टेट बैंक को उत्तम गैल्वा की तरफ से एकमुश्त भुगतान के प्रस्ताव को मौजूदा रूप में स्वीकार करना मुश्किल होगा। न्यूमटेल और आर्सेलरमित्तल ने आज यानी बुधवार को होने वाली लेनदारों की बैठक पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल की बोली आज औपचारिक रूप से खारिज कर दी जाएगी क्योंकि दोनों कंपनियां पात्रता जांच मेंं उत्तीर्ण नहीं हो पाई। आर्सेलरमित्तल की बोली इसलिए खारिज हुई क्योंकि उत्तम गैल्वा में इसकी 29 फीसदी हिस्सेदारी थी, जो एक साल से ज्यादा समय से एनपीए है। मित्तल ने हालांकि 29 फीसदी हिस्सेदारी मिगलानी फैमिली की निवेश फर्म को एस्सार की बोली सौंपे जाने से पहले बेच दी, लेकिन यह पात्रता जांच में पास नहीं हो पाई। केएसएस पेट्रोन में मित्तल के निवेश को भी इसके अपात्र होने की वजह बताई जा रही है, जबकि मित्तल कजाकिस्तान की केएसएस में अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं।
 
ऐसे में आर्सेलरमित्तल के पास क्या विकल्प हैं? वकीलों ने कहा कि बैंक पांचों कंपनियों को अनुमति देंगे, जिन्होंने अभिरुचि पत्र जमा कराए थे। इनमें निप्पॉन स्टील, टाटा स्टील, वेदांत, न्यूमेटल और आर्सेलरमित्तल शामिल है। वकीलों ने कहा कि एस्सार स्टील के लिए आर्सेलरमित्तल के साथ साझेदारी के जरिए बोली लगाने वाली निप्पॉन स्टील अकेले इस कंपनी के लिए दोबारा बोली लगा सकती है। आर्सेलरमित्तल लेनदारों की तरफ से बोली खारिज करने के खिलाफ एनसीएलटी में अपील कर सकती है और अनुकूल नतीजे की प्रतीक्षा कर सकती है।
 
आर्सेलरमित्तल आईबीसी संहिता व उपनियम 29 ए में बदलाव की प्रतीक्षा कर सकती है। उपनियम 29ए डिफॉल्ट करने वाले प्रवर्तकों से संबंधित है। कहा जा रहा है कि 29 ए में इस तरह से बदलाव होगा ताकि ज्यादा कंपनियां भाग ले सकें। नई परिभाषा के मुताबिक (जिसकी घोषणा जल्द होगी) जिन कंपनियों का किसी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के प्रबंधन पर नियंत्रण नहीं है वह आईबीसी के मामलों में आवेदन कर सकती है। आर्सेलरमित्तल और इसके प्रवर्तक एल एन मित्तल भारत में डिफॉल्ट करने वाली दो कंपनियों उत्तम गैल्वा स्टील्स व केएसएस पेट्रोन की गतिविधियों का प्रबंधन नहीं कर रहे हैं, लिहाजा उसे एस्सार स्टील के दूसरे दौर की बोली के लिए अनुमति दी जाएगी।
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