सेबी की सख्ती से बढ़ेगा डब्बा कारोबार!

पवन बुरुगुला | मुंबई Apr 04, 2018 09:47 PM IST

डब्बा कारोबार का रुख कर सकते हैं कारोबारी और निवेशक

नियामक ने नकद निपटान के बजाय अनुबंधों के भौतिक निपटान का रखा है प्रस्ताव

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के डेरिवेटिव ढांचे को सख्त बनाने के फैसले से डब्बा कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। बाजार भागीदारों के मुताबिक 'उत्पाद उपयुक्तता' और हाजिर निपटान के नियम लागू करने के कारण बहुत से कारोबारी और धनी निवेशक डब्बा कारोबार का रुख कर सकते हैं। नियामक के इस कदम से अवैध बाजार में फिर से हलचल बढ़ सकती है, जो नोटबंदी के बाद बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

डब्बा कारोबार स्टॉक एक्सचेंज के समान ही होता है, लेकिन इस पर नियामक का नियंत्रण नहीं होता है और न ही कोई कर लगता है। ये अनाधिकारिक लेनदेन होतेे हैं, इसलिए निवेशकों को प्रतिभूति लेनदेन कर या कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता है। इनमें कोई केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) दस्तावेज भी देने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग काले धन को सफेद बनाने और कर चोरी के मकसद से किया जाता है। इस वजह से डब्बा कारोबार को सरकार ने अवैध घोषित किया हुआ है। 

ब्रोकरों की एक संस्था एसोसिएशन ऑफ नैशनल एक्सचेंज्स मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) के अध्यक्ष के सुरेश ने कहा, 'सेबी के फैसले का भारतीय डेरिवेटिव बाजार पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। निवेशक कारोबारी प्रतिबंधों और वैकल्पिक प्लेटफॉर्मों का अभाव होने से डब्बा कारोबार जैसे समानांतर बाजारों का रुख कर सकते हैं, जहां कोई प्रतिबंध नहीं हैं। ऐसे बदलाव से भारतीय बाजारों में कारोबारी मात्रा और कीमत निर्धारण पर भी असर पड़ेगा।'

नए नियमों के मुताबिक व्यक्तिगत निवेशक डेरिवेटिव बाजार में एक निश्चित सीमा तक ही निवेश कर सकते हैं। यह सीमा कर रिटर्न में घोषित कुल आय पर आधारित होगी। अगर कोई निवेशक एक निश्चित निश्चित सीमा से ज्यादा निवेश करने का फैसला करता है तो ऐसे मामलों के लिए सेबी ने ब्रोकरों को कड़ी जांच-पड़ताल करने और उचित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।

इसके अलावा बाजार नियामक ने नकद निपटान की जगह भौतिक निपटान का भी प्रस्ताव रखा है। नकद निपटान में प्रवेश कीमत और अंतिम निपटान राशि के बीच का अंतर निवेशकों की पोजिशन के आधार पर उनके खाते में जमा या निकाल लिया जाता है। हालांकि निवेशकों को भौतिक निपटान में खरीद पोजिशन के लिए शेयरों की डिलिवरी लेनी होगी। बिकवाली पोजिशन के लिए उन्हें वे शेयर मुहैया कराने होंगे।

सेबी के आंकड़ों के मुताबिक डेरिवेटिव कारोबार में 85 फीसदी योगदान प्रोपराइटर कारोबारियों और खुदरा निवेशकों का होता है। असल में कारोबार में 25 फीसदी योगदान व्यक्तिगत निवेशकों का होता है, जो वायदा बाजार का इस्तेमाल हेजिंग के बजाय कारोबारी मकसद से करते हैं। उत्पाद उपयुक्तता लागू होने से उन निवेशकों के लिए डब्बा प्लेटफॉर्म ज्यादा मुफीद हो सकता है, जो बड़े जोखिम लेना पसंद करते हैं।  केआर चोकसी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रबंध निदेशक देवेन चोकसी ने कहा, 'सेबी का फैसले से भारतीय डेरिवेटिव बाजार में प्रतिबंधात्मक माहौल पैदा हुआ है। आधुनिक बाजारों में डेरिवेटिव अहम वित्तीय उत्पाद हैं, इसलिए किसी को भी भागीदारी के लिए निरुत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि प्रतिबंध लगाने से निवेशक बाजार से निकलेंगे या अन्य समानांतर बाजारों का रुख करेंगे।'

कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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